पहले चरण के मतदान के लिए लेह जिले में तैनात सैनिकों को पोस्टल बैलेट भेज दिए गए हैं, जबकि यहां पर तैनात दूसरे क्षेत्रों के पोलिंग अधिकारियों और कर्मचारियों की वोटिंग हो गई है और इनके मतदान को पोस्टल बैलेट में सील कर लिया गया है। लेह के दो विधानसभा क्षेत्रों में मतदान के लिए पोलिंग पार्टियों को भी भेज दिया गया है। रविवार शाम को 4 बजे चुनाव प्रचार भी थम गया।
लेह के उपायुक्त एवं जिला चुनाव अधिकारी, सिमरण दीप सिंह ने बताया कि पांच तरह की पोस्टल बैलेट पोलिंग होती हैं। इसमें सर्विस वोटिंग, पोलिंग आफिशियल, फारेन सर्विस, स्पेशल वोटर और चुनाव में खलल डालने वाले शामिल हैं। लेह में 4000 सैन्य जवानों को पोस्टल बैलेट भेजा गया है, जबकि पोलिंग आफिशियल में 226 अधिकारियों और कर्मचारियों की वोटिंग हुई है।
274 मतदान केन्द्रों पर 127 पोलिंग पार्टियां भेज दी गई हैं। बाकी की सोमवार को भेज दी जाएंगी। लेह में पहले चरण का मतदान शाम 4 बजे थम गया। कारगिल जिले में भी 1100 सैन्य कर्मियों को पोस्टल बैलेट भेजे गए हैं। उल्लेखनीय है कि इन दोनों जिलों की चार सीटों के लिए होने वाले मतदान में सैन्य जवानों के वोट काफी अहमियत रखते हैं।
दोनों जिलों में 5000 सैन्य वोट हैं, जो उम्मीदवारों की हार-जीत तय करते हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव में सभी जवान मतदान नहीं कर पाए थे। तकनीकी जानकारी के अभाव में 5000 में से सिर्फ 2000 जवानों ने ही मतदान किया और इसमें से भी 1100 वोट रिजेक्ट कर दिए गए। इस बार जवानों को मतदान करने की पूरी जानकारी दी गई है, ताकि चुनाव में एक मत भी बेकार न जाए। दोनों जिलों में चार विधानसभा सीटें हैं।