जिले के दूरदराज पहाड़ी इलाकों में लोगों की जान भगवान भरोसे है। इन इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर मात्र खानापूर्ति की जा रही है। हालात ऐसे हैं कि बनी तहसील की करीब एक लाख की आबादी पर मात्र पांच डाक्टर ही हैं।
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बनी ब्लाक में डाक्टरों के चौबीस पद सृजित हैं, जबकि उपलब्ध मात्र पांच हैं। यह वह अस्पताल है, जहां दूरदराज के इलाकों से लोग बेहतर इलाज की उम्मीद लिए पहुंचते हैं।
उधर, ग्रामीण स्तर पर प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों की हालत इससे भी बदतर है। बनी मेडिकल ब्लाक में तीन पीएचसी हैं, जिसमें से एक कोटी चंडियार, एक ढग्गर और एक संदरूण में है। यहां भी डाक्टरों के आठ पद सृजित किए गए हैं, जबकि एक भी एमबीबीएस डाक्टर नहीं है।
पीएचसी ढग्गर में दो एनआरएचएम डाक्टरों को तैनात किया गया था, इसमें से एक महात्मा गांधी जच्चा बच्चा अस्पताल, जबकि दूसरे को भी बनी उपजिला अस्पताल में अटैच कर दिया गया। फिलहाल मेडिकल असिस्टेंट ही लोगों को उपचार और दवाएं मुहैया करवा रहे हैं।
कोटी चंडियार की पीएचसी के पास तो अपनी इमारत ही नहीं है। यहां एक ही कमरे में इलाज चलता है और दवाएं भी यहीं से दी जाती हैं। यहां भी एक आयुर्वेदिक डाक्टर के सहारे ही इलाज दिया जाता है।
संदरूण में स्वास्थ्य विभाग ने माडर्न पीएचसी बनाई, लेकिन यहां भी एक ही आयुर्वेदिक डाक्टर है, जिसकी सेवाएं भी आम तौर पर उपजिला अस्पताल बनी में ही ली जाती हैं। ऐसे में यह इलाका भी मेडिकल असिस्टेंट के सहारे चल रहा है। तीनों पीएचसी में आठ में से एक भी एमबीबीएस डाक्टर उपलब्ध नहीं है।