शोध टीम के अनुसार मछलियों को प्रजनन से पहले ही पकड़ लिया जा रहा है। शोध का उद्देश्य मछलियों की घटती संख्या के कारण तलाशना है। शोध में पता चला है कि जो मछली पांच हजार के करीब अंडे देने में सक्षम थी, वे अब केवल एक से दो हजार के करीब अंडे दे पा रही है। मछलियों की दूसरी स्टेज जिसे फ्राई (अंडे के बाद वाली स्टेज) कहा जाता है वे भी लुप्त होती जा रही हैं। प्रदूषित पानी के कारण मछली के सेल, गिल्स, किडनी आदि शरीर के अंगों में बड़े बदलाव आ रहे हैं।
तवी नदी के कम बहाव वाले क्षेत्र में मछलियों की 125 के करीब प्रजातियां पाई जाती हैं। जिनमें विभिन्न प्रकार की कॉमन कार्प, लेबियो डेरो, लोबियो बोगा, कारा, कैटफिश, लोची मछली, बड़ी व छोटी सजावटी मछलियां पाई जाती हैं। इसके अलावा अधिक बहाव वाले क्षेत्र में 36 प्रजातियां पाई जाती हैं।