अरनिया के छोटी कूल से सुहागपुर गोशाला तक गेहूं की फसल में आग लगने से करीब 50 परिवारों की महीनों की मेहनत स्वाहा हो गई। इस पर किसान दमकल विभाग को ही घटना का जिम्मेदार बता रहे हैं। उनका आरोप है कि विभाग से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी दमकल की गाड़ियां इलाके में तैनात नहीं की गईं। 150 कनाल फसल की आग बुझाने में एक गाड़ी लगी हुई थी, और एक मौके पर पहुंच ही नहीं पाई।
आग में मेहनत का पसीना भाप बनकर उड़ते किसानों और दमकल कर्मियों दोनों ने देखा है। किसानों का कहना है कि दमकल विभाग से निरंतर क्षेत्र में अस्थायी रूप से गाड़ियां खड़ी करने के लिए कहा। फिर भी उनकी बात को नजरअंदाज किया गया। दमकल विभाग के अधिकारी एक-दूसरे को काम बताने में समय बर्बाद करते रहे। इसके चलते सोमवार को आग लगने से सैकड़ों कनाल गेहूं राख हो गया। अगर दमकल की गाड़ियां क्षेत्र में तैनात होतीं तो ऐसी घटना नहीं होती।
किसान करनैल सिंह ने कहा कि उनकी 10 कनाल गेहूं की फसल राख हो गई है। यह सब दमकल विभाग के अधिकारियों की वजह से हुआ है। समय पर गाड़ियों की तैनाती नहीं की गई, इसलिए किसान आज यह दिन देख रहे हैं। किसान रामपाल सैनी ने कहा कि गेहूं की फसल पक कर तैयार थी, और एक-दो दिन में उसकी कटाई शुरू होनी थी।
लेकिन, उससे पहले ही आग ने सारी मेहनत पर मिट्टी में मिला दी। किसान वीर सिंह ने बताया कि उनकी 12 कनाल फसल जल गई है। अगर दमकल विभाग इलाके में गाड़ी तैनात कर देता, तो यह घटना न होती। किसान खेतों में काम कर रहे हैं। वे बार बार जाकर गाड़ी तैनात करने की अर्जी नहीं दे सकते।
पंचायत के सरपंच सुभाष सैनी ने बताया कि दमकल की गाड़ी तैनात करने को लेकर एसडीपीओ आरएस पुरा को ज्ञापन सौंपा गया था। उससे पहले आला अधिकारियों को क्षेत्र में गाड़ी तैनाती के लिए निरंतर कहा जाता रहा है, लेकिन किसानों की समस्या को नजरअंदाज कर दिया गया। सोमवार को हुई घटना का कारण नहीं पता, लेकिन इसका जिम्मेदार प्रशासन ही है। जिन लोगों की गेहूं की फसल जल गई है, उन्हें जल्द से जल्द उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। मुआवजे के नाम पर खानापूर्ति नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि अस्थायी तौर पर गाड़ी की तैनाती को लेकर पंचायत ब्यासपुर परलाह के लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल एडीडीसी जम्मू से अर्जी पास करवाने के बाद उपनिदेशक दमकल विभाग के पास गया था। तब उपनिदेशक ने पल्ला झाड़ते हुए कहा था कि गाड़ियों की तैनाती करना निदेशक का काम है। किसान निदेशक को अपनी बात बताएं।
लोग जब निदेशक के पास गए तो वह दफ्तर में ही नहीं थे। बताया गया था कि वह सोमवार को आएंगे। सोमवार को भी निदेशक से मुलाकात नहीं हो पाई। इसी बीच फसलों को आग लग गई। 150 कनाल फसल में आग लगी और उस पर काबू पाने के लिए मौके पर दमकल की केवल एक ही गाड़ी पहुंची। इससे पता चलता है कि विभाग किसानों की समस्या को लेकर कितना गंभीर है।