रियासत की सियासत में एक बार फिर उथल-पुथल देखने को मिली है। वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू को पीडीपी प्रमुख तथा मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को वित्त मंत्री पद से हटा दिया। डा. द्राबू ने दिल्ली में दिए एक भाषण में कहा था कि कश्मीर राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक मुद्दा है।
यह बात पीडीपी समेत कश्मीर की तमाम राजनीतिक पार्टियों व नेताओं को नागवार गुजरी। राज्यपाल ने महबूबा के द्राबू को हटाने संबंधी सिफारिश को मंजूर कर लिया। इसके साथ ही वित्त विभाग का दायित्व अब मुख्यमंत्री के पास होगा। हालांकि, द्राबू से जुड़े लोगों का कहना है कि उन्होंने खुद ही इस्तीफा दिया है।
सूत्रों के अनुसार पीडीपी प्रमुख ने सोमवार को शहर में लौटते ही इस संबंध में फैसला लिया। इस मुद्दे पर पार्टी की हो रही किरकिरी से बचने के लिए उन्होंने राज्यपाल एनएन वोहरा को पत्र लिखकर द्राबू को मंत्रिमंडल से हटाने की सिफारिश की।
माना जा रहा है कि पीडीपी की अंदरुनी राजनीति के तहत इस मुद्दे पर द्राबू के खिलाफ मोर्चा खोला गया। पार्टी के भीतर भी उनके विरोधियों ने बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई। नई दिल्ली में बीते दिनों पीएचडी चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के कार्यक्रम में दिए गए बयान के बाद रियासत में सियासी बवंडर उठ खड़ा हुआ।
पीडीपी की अनुशासन कमेटी ने उन्हें नोटिस जारी कर स्थिति साफ करने को कहा। सूत्रों ने बताया कि फिलहाल द्राबू ने अनुशासन कमेटी को जवाब नहीं भेजा है। पीडीपी उपाध्यक्ष सरताज मदनी का कहना था कि इस बयान से पार्टी के स्टैंड तथा छवि को धक्का पहुंचा है।
पीडीपी मानती है कि जम्मू-कश्मीर राजनीतिक मुद्दा है और केवल बातचीत से ही हल संभव है। द्राबू ने कोर इश्यू पर पार्टी के स्टैंड के विपरीत बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने जम्मू कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थापना इसी कोर इश्यू के साथ की थी।
वित्त मंत्री का बयान राजनीतिक एजेंडे से हटकर है। विपक्षी दल नेशनल कांफ्रेंस तथा सीपीआई (एम) ने भी द्राबू के बयान पर पीडीपी को घेरते हुए कहा कि यह बयान शर्मनाक है। हुर्रियत (एम) के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक और अलगाववादी नेता यासीन मलिक ने भी द्राबू को घेरा था।