फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जम्मू कश्मीरः सीएम महबूबा ने वित्त मंत्री द्राबू को किया मंत्रिमंडल से बाहर

Mon, 12 Mar 2018 10:28 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,जम्मू
विज्ञापन
Haseeb Drabu - फोटो : File Photo
विज्ञापन

रियासत की सियासत में एक बार फिर उथल-पुथल देखने को मिली है। वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू को पीडीपी प्रमुख तथा मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को वित्त मंत्री पद से हटा दिया। डा. द्राबू ने दिल्ली में दिए एक भाषण में कहा था कि कश्मीर राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक मुद्दा है।

विज्ञापन


यह बात पीडीपी समेत कश्मीर की तमाम राजनीतिक पार्टियों व नेताओं को नागवार गुजरी। राज्यपाल ने महबूबा के द्राबू को हटाने संबंधी सिफारिश को मंजूर कर लिया। इसके साथ ही वित्त विभाग का दायित्व अब मुख्यमंत्री के पास होगा। हालांकि, द्राबू से जुड़े लोगों का कहना है कि उन्होंने खुद ही इस्तीफा दिया है।

सूत्रों के अनुसार पीडीपी प्रमुख ने सोमवार को शहर में लौटते ही इस संबंध में फैसला लिया। इस मुद्दे पर पार्टी की हो रही किरकिरी से बचने के लिए उन्होंने राज्यपाल एनएन वोहरा को पत्र लिखकर द्राबू को मंत्रिमंडल से हटाने की सिफारिश की।
विज्ञापन


माना जा रहा है कि पीडीपी की अंदरुनी राजनीति के तहत इस मुद्दे पर द्राबू के खिलाफ मोर्चा खोला गया। पार्टी के भीतर भी उनके विरोधियों ने बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई। नई दिल्ली में बीते दिनों पीएचडी चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के कार्यक्रम में दिए गए बयान के बाद रियासत में सियासी बवंडर उठ खड़ा हुआ।

पीडीपी की अनुशासन कमेटी ने उन्हें नोटिस जारी कर स्थिति साफ करने को कहा। सूत्रों ने बताया कि फिलहाल द्राबू ने अनुशासन कमेटी को जवाब नहीं भेजा है। पीडीपी उपाध्यक्ष सरताज मदनी का कहना था कि इस बयान से पार्टी के स्टैंड तथा छवि को धक्का पहुंचा है।

पीडीपी मानती है कि जम्मू-कश्मीर राजनीतिक मुद्दा है और केवल बातचीत से ही हल संभव है। द्राबू ने कोर इश्यू पर पार्टी के स्टैंड के विपरीत बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने जम्मू कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थापना इसी कोर इश्यू के साथ की थी।

वित्त मंत्री का बयान राजनीतिक एजेंडे से हटकर है। विपक्षी दल नेशनल कांफ्रेंस तथा सीपीआई (एम) ने भी द्राबू के बयान पर पीडीपी को घेरते हुए कहा कि यह बयान शर्मनाक है। हुर्रियत (एम) के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक और अलगाववादी नेता यासीन मलिक ने भी द्राबू को घेरा था।

विज्ञापन

क्या कहा था
नई दिल्ली में बीते दिनों पीएचडी चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के कार्यक्रम में द्राबू ने कहा था कि जहां तक वे देखते हैं जम्मू-कश्मीर राजनीतिक मुद्दा नहीं है। पिछले 50-70 साल से हम गलत शोर मचा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर को एक युद्ध ग्रस्त राज्य या राजनीतिक समस्या की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।

बल्कि इसे एक समाज की तरह सामाजिक मुद्दों के साथ देखना चाहिए। हमें दूसरे से बात करने से पहले खुद से बात करनी चाहिए और यह राष्ट्रीय स्तर पर भी होना चाहिए। राज्य के लोगों की चिंता को भी शामिल करने की जरूरत है। हमें प्रतीकों के जंगल में नहीं खोना चाहिए।

उन्होंने घरेलू और बाहरी निवेशकों से अपील की कि वे जम्मू-कश्मीर में अपने एजेंडे लेकर रुख करें। कश्मीर को बेचने की कोई जरूरत नहीं है, यह पहले ही बेचा गया है, बल्कि यहां बिजनेस प्लेटफार्म देने की जरूरत है।  

द्राबू को चुकानी पड़ी भाषण की कीमत: उमर
जम्मू। पूर्व मुख्यमंत्री तथा नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू को भाषण की कीमत चुकानी पड़ी। ट्वीट कर कहा कि पीएचडी चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री की भाषण की कीमत चुकानी पड़ी।

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने उनकी टिप्पणी पर कठोर कार्रवाई करते हुए उन्हें मंत्रिमंडल से हटा दिया। वित्त विभाग में उन्हें कौन बदलेगा यह देखना दिलचस्प होगा।

उत्तराधिकारी की तलाश तेज
द्राबू के उत्तराधिकारी की तलाश तेज हो गई है। पार्टी में इसके लिए वर्तमान मंत्रियों में द्राबू के चेहरे की तलाश की जा रही है। इसके साथ ही नए चेहरे को भी लाने पर विचार किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में नए वित्त मंत्री की नियुक्ति हो सकती है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें