कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद होने वाले सुरक्षा बलों के जवानों की संख्या में कमी आई है। वर्ष 2015 में आतंक विरोधी अभियान में 41 जवान शहीद हुए।
वर्ष 2013 में शहीदों की संख्या में हलकी बढ़ोतरी (110 से 113) हुई थी, लेकिन वर्ष 2014 में यह संख्या 51 हो गई थी। 2015 में इसमें और कमी आई। हालांकि इस साल रियासत के युवाओं में कट्टरता बढ़ी है।
खासकर आईएसआईएस के आने के बाद इसमें इजाफा हुआ है। लेकिन सुरक्षा बल आतंकियों का प्रभावशाली ढंग से सामना करने में सफल रहे हैं। मुठभेड़ में मरने वाले आतंकियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। वर्ष 2012 में 84 आतंकी मार गिराए गए थे, जबकि 2013 में 100 मारे गए।
बुरहान बना नई चुनौती
वर्ष 2015 में सुरक्षा बलों को आतंकी कमांडर बुरहान वानी के रूप में नई चुनौती का सामना करना पड़ा जो घाटी में हिजबुल मुजाहिदीन का युवा चेहरा है।
वह 11 सदस्यीय टीम के साथ सोशल नेटवर्किंग में युवाओं को आतंकी संगठन की ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रहा है। बुरहान ने फेसबुक में कई तस्वीरें पोस्ट कीं।
इसमें हथियारों का प्रदर्शन करने के साथ असाल्ट राइफल के साथ युवाओं को प्रशिक्षण देने के वीडियो जारी किए गए। ताकि सुरक्षा बलों को मानसिक रूप से कमजोर किया जा सके। बुरहान ने एक वीडियो से संदेश जारी कर लोगों को जिहाद के बारे बताया और कश्मीरी युवाओं को आतंकवाद से जुड़ने की अपील की।
साल की शुरुआत ही आतंकियों के मरने से हुई
वर्ष 2015 के आरंभ में ही 15 जनवरी को केलार वन में हुई मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद के ग्रुप कमांडर व पाकिस्तानी आतंकी अबु तोयबा सहित पांच आतंकी मारे गए।
15 दिनों बाद आतंकियों के हमले में आर्मी के कर्नल एमएन राय और पुलिस के अधिकारी को पुलवामा में शहीद हो गए। मुठभेड़ में दो आतंकी भी ढेर हुए। जनवरी में 10 आतंकियों की मौत हुई।
फरवरी में आठ आतंकियों को मार गिराया गया। सितंबर माह में कश्मीर में 18 गुरिल्लों को मार गिराया गया। इस दौरान चार सुरक्षाकर्मी शहीद हुए।