जम्मू। छठ पूजा का पर्व कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस बार छठ की शुरुआत शुक्रवार 28 अक्तूबर से होगी और 31 अक्तूबर को इसका समापन होगा। शुक्रवार से नहाय खाय के साथ चार दिवसीय छठ महापर्व शुरू हो जाएगा। शनिवार को दूसरे दिन शाम को व्रती गुड़ से बनी खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण कर उपवास शुरू करेंगे। रविवार को अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा और सोमवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही व्रत संपन्न होगा। चार दिवसीय छठ पर्व में सूर्य देव की पत्नी (ऊषा) माता छठी की पूजा की जाती है। सूर्य देवता की पूजा का महत्व पुराणों में निकलता है।
पहला दिन : नहाय खाय
- शुक्रवार को नहाय खाय से छठ पूजा की शुरूआत होगी। इस दिन सूर्योदय के पहले पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है। इसके बाद एक समय का ही भोजन खाया जाता है। पुराणों में कद्दू खाने का महत्व बताया गया है।
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दूसरा दिन : खरना
छठ का दूसरा दिन खरना होता है, जो कार्तिक शुक्ल की पंचमी तिथि को आता है। इस दिन व्रती निराहार रहते हैं। शाम को खीर और रोटी का प्रसाद सभी को दी जाती है। इस दिन ईष्ट मित्र एवं रिश्तेदारों को न्यौता दिया जाता है।
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तीसरा दिन : पहला अर्घ्य
छठ के तीसरे दिन को सबसे प्रमुख माना जाता है। शाम के समय भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य ़दिया जाता है, जिसके लिए किसी नदी अथवा तालाब के किनारे जाकर टोकरी या सूप में फल व अन्य पूजन सामग्री सजाई जाती है। समूह में भगवान सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। इस समय दान का भी महत्व होता है। इस दिन घरों में प्रसाद बनाया जाता है, जिसमें लड्डू अहम होता है।
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चौथा दिन
चौथे दिन सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी को आता है। यह अर्घ्य लगभग 36 घंटे के व्रत के बाद दिया जाता है। इसके बाद व्रती पारण करने के बाद व्रत का समापन करते हैं।