नेशनल कांफ्रेंस के मुखिया डॉ. फारुक अब्दुल्ला के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर से जुड़े 13 दलों के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर राज्य में जल्द चुनाव कराने की मांग की। इससे पहले इन दलों के नेताओं की बैठक हुई जिसमें पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग की गई।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नवी आजाद ने विपक्ष की मुहिम से अपने आपको दूर रखा। जम्मू से श्रीनगर रवाना होने से पहले पीडीपी प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि विधानसभा चुनाव कब हों, यह उनकी पार्टी की प्राथमिकता नहीं है। वर्ष 2019 के बाद प्रदेश की जनता मुश्किलों व परेशानियों का सामना कर रही है। इन समस्याओं की जानकारी देश के विभिन्न दलों तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है।
आयोग से मुलाकात के बाद फारू अब्दुल्ला ने कहा ने कहा है कि हमे इस मामले को गंभीरता से देखने का आश्वासन मिला है। आयोग ने कहा है कि जल्द ही वह इस मुद्दे पर बैठक बुलाएगा। यह बेहद दुर्भाग्य की बात है कि ऐसा राज्य जो भारत का ताज है, उसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया।
प्रतिनिधिमंडल में ये थे शामिल: आयोग से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस से प्रमोद तिवारी, नासिर हुसैन, नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद हसनैन मसूदी, रतन लाल गुप्ता, रविंदर शर्मा, पैंथर्स पार्टी से हर्षदेव सिंह, एएनसी से मुजफ्फर शाह, पीडीपी से अमरीक सिंह रमी, सीपीआईएम से मास्टर हरि सिंह, डोगरा सदर सभा से गुलचैन सिंह, शिवसेना से मुनीश साहनी, आप से तरनजीत सिंह टोनी, सुनील डिंपल सहित कई अन्य दलों के नेता शामिल थे। राज्य की सभी पार्टियां वहां जल्द से जल्द लोकतांत्रिक सरकार के गठन के साथ पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने पर सहमत हैं।
आयोग को सौंपा ज्ञापन
प्रतिनिधिमंडल ने आयोग को ज्ञापन भी सौंपा। इस पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, एनसीपी नेता शरद पवार, सीपीआई एम महासचिव सीताराम येचुरी, आप नेता संजय सिंह, प्रो. रामगोपाल यादव व अन्य ने हस्ताक्षर किए। इसमें कहा गया है कि संविधान की भावना के विपरीत बिना जनप्रतिनिधि तथा बिना जिम्मेदार प्रशासन को सरकार चलाने की अनुमति दी गई है जो सामान्य जनता के लिए कष्टदायी है।
संविधान की बाध्यताओं के अनुसार चुनाव आयोग को जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराना चाहिए। इसलिए बिना देर किए चुनाव कराना चाहिए ताकि जनता के लोकतांत्रिक तथा मूलभूत अधिकार बहाल हो सकें। पंचायत चुनाव तथा अन्य संस्थाओं के चुनाव विधानसभा आयोग इस आधार पर चुनाव में देरी विधानसभा चुनाव तय समय पर नहीं कराने चाहिए।
दिल्ली में कर रहे ड्रामेबाजी- रविंद्र रैना
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना ने नेकां अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला की अगुवाई में नई दिल्ली में हो रही बैठकें और चुनाव आयोग से मिलने को सियासी ड्रामेबाजी बताया है। रैना का कहना है कि बिन सत्ता के जम्मू-कश्मीर में कई नेता छटापटा रहे हैं। प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ही इस वक्त तैयार है।
आजाद के ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर नहीं
गुलाम नबी आजाद तथा उनकी पार्टी ने विपक्षी एकता से दूरी बनाए रखी। आयोग से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में न तो आजाद और न ही उनका कोई नुमाइंदा शामिल हुआ। यहां तक कि आयोग को सौंपे गए ज्ञापन में भी डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी) की ओर से भी हस्ताक्षर नहीं किए गए।