डा. फारूक अब्दुल्ला
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पूर्व मुख्यमंत्री और नेकां के अध्यक्ष डा. फारूक अब्दुल्ला के पीओके पर दिए गए विवादित बयान से सियासी भूचाल खड़ा हो गया है। चिनाब वैली के दौरे के दौरान उन्होंने पीओके पर भारत के दावे को लेकर विवादित बयान दिया।
उनकी जुबान फिसल गई और बोल पड़े कि पीओके भारत की बपौती नहीं है जिसे वह हासिल कर ले। मोदी सरकार को चुनौती भी दी कि वह पीओके को लेकर दिखाए। फारूक के बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है।
एक कार्यक्रम में उन्होंने पीओके पर संसद के प्रस्ताव पर कहा कि पीओके फिलहाल पाकिस्तान के कब्जे में है। यह भारत की निजी संपत्ति नहीं जिस पर वह अपना दावा इस तरह करे जैसे पुरखों की संपत्ति हो। कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान एक पक्ष है। कश्मीर समस्या के समाधान के लिए भारत के पास पाकिस्तान के साथ बातचीत करने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा ने फारूक के बयान की निंदा की है। कहा कि ऐसे बयानों से फारूक अपना ही नुकसान कर रहे हैं। फारूक हों या उनके पुत्र उमर अब्दुल्ला ऐसे बयान देते रहे हैं जिसका कोई सियासी सरोकार नहीं रहा है। जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और भाजपा पीओके को भारत में शामिल किए जाने के पक्ष में है।
कांग्रेस प्रवक्ता रविंद्र शर्मा का कहना है कि पीओके समेत पूरा जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। यदि फारूक अब्दुल्ला ने असंवैधानिक भाषा का इस्तेमाल किया है तो उन्हें इसके बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए। फारूक अपना पोजीशन साफ करें।