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फारूक अब्दुल्ला बोले- दम है तो पीओके लेकर दिखाएं मोदी, रोका किसने है

Mon, 27 Nov 2017 12:44 AM IST
एसके खाजूरिया / अमर उजाला, कठुआ
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- फोटो : BASIT ZARGAR
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पाकिस्तान के पास जो कश्मीर है उसे अगर वापिस लेना है तो सरकार ले ले, उसे किसी ने रोका नहीं है और न ही नेकां या कांग्रेस ने ऐसा करने से मना किया है। सरकार के पास पावर है फौज है दम है तो जाकर लड़ें और मुजर्फाबाद में जाकर झंडा लहराएं दफ्तर भी खोल देंगे।
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लेकिन इससे पहले सरकार यह बताए कि क्या भारत पाक के बीच पैदा हुए वर्तमान स्थिति को बदलने के लिए वह पाकिस्तान से बात करने को तैयार है। बार बार पीओके की बात करने से पहले श्रीनगर में भाजपा अपना झंडा तो लहराए।

उक्त बातें नेंका सदर डा. फारूक अब्दुल्ला ने रविवार को कठुआ में पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए कहीं। वहीं पार्टी कार्यकर्ता के घर पर आयोजित एक शादी समारोह में हिस्सा लेने के लिए आए थे। जिसके बाद उन्होंने लखनपुर में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक भी की।
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उन्होंनें राज्य में अमन बहाली के लिए सरकार को पहल न करने और देरी करने के लिए भी जिम्मेदार ठहराया। अब्दुल्ल ने कहा कि सरकार बार बार राज्य में अमन बहाली की बात करती है और पहले से स्थित को बेहतर बताती है।

अगर ऐसा है तो हर दिन जवानों के शहीद होने के समाचार सामने क्यों आते हैं क्यों हर दिन जवान शहीद हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और भारत के बीच इस जंग का हल बातचीत से होगा और अगर केंद्र और राज्य सरकार ऐसा चाहती है तो उसे पाकिस्तान के साथ भी बात करनी होगी।

उन्होंने कहा कि बार बार वार्ताकार को राज्य में भेजने से क्या होगा। वार्ताकार राज्य की समस्या की जड़ को तो समझते नहीं और पुरानी रिपोर्ट भी देख लें तो वार्ताकारों के आने से राज्य को क्या लाभ मिला है।

उन्होंने कहा कि सरकार पत्थरबाजों को छोड़ने की बात कर रही है और कई उन्हें न छोड़ने की बात कर रहे हैं लेकिन सरकार कुछ भी साफ नहीं कर रही है। साफ है कि सरकार लोगों को गुमराह कर रही है।

उन्होंने कहा कि पीडीपी के सामने भाजपा ने घुटने टेक दिए हैं और कठुआ में हुए जनता दरबार में भी यह देखने को मिला। राज्य की मुख्यमंत्री के सामने भाजपा न कोई मंत्री कुछ बोला और न ही विधायक। 

पाक से बातचीत में हमने ही की देरी

डा. अब्दुल्ला ने कहा कि जब परवेज मुर्शरफ ने बातचीत के लिए कहा था और बिना जनमत संग्रह के आउट आफ द बाक्स बात करने को तैयार थे तो हमारी ओर से ही देरी हुई। शिमला हो या ताशकंड समझौता हमने ही पाकिस्तान को उनकी भूमि वापिस दी है।

क्या कभी किसी जंग में उनके इलाके में एक इंच भी गए उल्टा समझौते कर जीती हुई भूमि भी वापिस दी। ऐसे में बार बार पीओके का राग अपनाने से बेहतर है कि जो अपने पास है उसे तो संभाला कर रखा जाए।

फारूक को दिखाए गए काले झंडे
नेकां अध्यक्ष डा. फारूक अब्दुल्ला को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने रविवार को काले झंडे दिखाए और नारे लगाए। पीओके पर विवादित बयान देने पर डा. फारूक के खिलाफ बजरंग दल के कार्यकर्ताओं में नाराजगी थी।

इसके चलते उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। पुलिस ने करीब 15 बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया और देर शाम उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया।रविवार दोपहर को फारूक ओल्ड रिहाड़ी में पार्टी के युवा नेता तनवीर के आवास पर निजी कार्यक्रम में शरीक होने जा रहे थे।

इस दौरान रास्ते में बजरंग दल के कार्यकर्ता राकेश बजरंगी के नेतृत्व इकट्ठा हुए और फारूक के काफिले के सामने आ गए। उन्होंने काले झंडे दिखाते हुए उनका विरोध शुरू कर दिया।
इस दौरान सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मियों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक लिया। राकेश ने कहा कि देश विरोधी बात करने के बावजूद एनसी प्रमुख के खिलाफ कार्रवाई न किया जाना गलत है। 
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अमेरिका नहीं रूस है भारत का दोस्त

हाफिज सईद की रिहाई और भारत द्वारा इसके खिलाफ अमेरिका की मदद के सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को यह बात समझनी होगी कि अमेरिका दोस्त नहीं है। वह दुनिया के किसी भी देश को कभी दोस्त नहीं रहा हर देश के साथ उसने दोहरी चाल चली है। 1971 जंग को देख लें तो मदद अमेरिका ने नहीं रूस ने की थी। प्रधानमंत्री इस बात को समझें और अमेरिका का राग न गाएं। 

फारूक ने गाया राम भजन
रविवार को कठुआ पहुंचे नेकां सदर डॉ. फारूक अब्दुल्ला राम भजन पर खूब झूमे। उन्होंने राम भजन गाकर धर्मनिरपेक्षता का संदेश दिया। एक पार्टी कार्यकर्ता के घर शादी समारोह में पहुंचे फारूक अब्दुल्ला ने ‘मोरे राम ढूंढो, ढूंढो रे सखी कित गए मोरे राम’ भजन गाकर सबको चकित कर दिया।

भजन से पूर्व उन्होंने कार्यकर्ताओं को धर्म की राजनीति न करने की सलाह भी दी। उनके द्वारा गाए राम भजन की तारीफ न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं ने, वरन लाउडस्पीकर के माध्यम से जिसने भी सुना उसने उनकी सुरों पर पकड़ और राम का भजन गाने की जमकर तारीफ की। 
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