नेशनल कांफ्रेंस के मुखिया पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला का दावा है कि पीडीपी के दस विधायकों ने नेकां में शामिल होने के लिए उनसे संपर्क किया है। नेकां अगर चाहती तो इन विधायकों को पार्टी में शामिल कर सरकार गिरा सकती थी, लेकिन, अस्थिरता फैलाने में नेकां का विश्वास नहीं रहा है।
नेकां चुनाव की सियासत में विश्वास करती है। फारूक ने कहा कि यही कारण है कि हमने पिछले विधानसभा चुनाव के जनादेश को स्वीकारते हुए विपक्ष में बैठने का निर्णय लिया जम्मू में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद फारूक ने कहा कि अस्थिरता फैलाना पीडीपी की फितरत रही है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने आरोप लगाया था कि हाल में कश्मीर में हुई हिंसा और उपद्रव में नेकां का हाथ रहा है। मुख्यमंत्री ने नेकां पर उपद्रवियों को उकसाने का आरोप लगाया था।
'मुफ्ती मोहम्मद सईद भी कभी नेशनल कांफ्रेंस में आना चाहते थे'
फारूक अब्दुल्ला
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महबूबा के आरोपों पर पलटवार करते हुए फारूक ने कहा कि नेकां कभी पत्थर नहीं उठाती है और न ही पत्थर उठाने वालों को समर्थन देती है। उन्होंने कहा कि अशांति और अस्थिरता फैलाकर सत्ता हासिल करने की रणनीति पर पीडीपी ही चलती रही है। उन्होंने कहा कि मुफ्ती मोहम्मद सईद भी कभी नेशनल कांफ्रेंस में आना चाहते थे।
कांग्रेस के सदर रहते हुए उन्होंने इसके लिए प्रयास किया था। फारूक ने कहा कि साजिश के तहत उनकी सरकार को गिराकर गुलाम मोहम्मद शाह को मुख्यमंत्री बनाए जाने के इतहिास को लोग भूले नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नेकां के शासनकाल में पीडीपी ने हमेशा उपद्रवियों को उकसाकर पत्थरबाजी कराई। हिंसा को भी बढ़ावा दिया।
'पीडीपी ने नेकां के विधायकों को खरीदने की कोशिश की थी'
पीडीपी की अध्यक्षा महबूबा मुफ्ती
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फारूक ने कहा कि 2002 में जब नेकां के 28 विधायक थे और पीडीपी के 16 एमएलए चुनकर आए थे, तब पीडीपी ने नेकां के विधायकों को खरीदने की कोशिश की थी। बाद में कांग्रेस और पीडीपी के गठबंधन से सरकार बनी।
कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद के मुख्यमंत्री बनने से पहले पीडीपी ने नेकां के विधायकों को प्रलोभन देकर सरकार बनाने की साजिश रची थी। उन्होंने कहा कि हमने हमेशा बातचीत से कश्मीर समस्या के समाधान की बात की है। भाजपा और पीडीपी के गठबंधन एजेंडा में भी हुर्रियत से बातचीत का जिक्र है।