सांबा। केंद्र सरकार ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केसीसी बनाए ताकि वे बैंक से ऋण ले सकें और अपनी फसल का बीमा करवा सकें। फसल के नष्ट होने पर इसकी भरपाई हो सके, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
किसान दौलत राम, सोहन सिंह, बलवीर सिंह और गोपाल दास के अनुसार उन्होंने धान की फसल के समय भी फसल बीमा करवाया था। कुछ किसानों की धान की फसल नष्ट हुई थी लेकिन उन्हें मुआवजा ही नहीं मिला। उनके अनुसार गेहूं की फसल का बीमा ही नहीं किया गया। हम बैंक में जाकर बीमा करवाने की कहते रहे लेकिन उन्हें कहा गया कि इस फसल के लिए किसी भी कंपनी ने टेंडर ही नहीं उठाया था। इस कारण किसानों की गेहूं की फसल का बीमा ही नहीं किया जा सका। आज किसान अपनी फसल के नुकसान होने पर चिंतित हैं। फसल की बिजाई के दौरान भी कभी समय पर खाद व बीज नहीं मिलता तो कई बार बिजली की आंख मिचौनी से किसानों के पंपसेट तक नहीं चलते हैं। अब तक 37 हजार हेक्टेयर गेहूं की फसल का बीमा नहीं हुआ है। इससे 34 हजार किसान फसल बीमा से वंचित रहे। वहीं 300 से अधिक कनाल गेहूं की फसल जलकर राख हो चुकी है। ऐसे में किसान काफी परेशान हैं।
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फसल बीमा योजना के लिए राष्ट्रीय स्तर पर टेंडर होते हैं। इस बार गेहूं की फसल के लिए किसी कंपनी ने टेंडर ही नहीं उठाया था। जम्मू कश्मीर के चार जिले बीमा योजना से वंचित रहे हैं। अब अगली धान की फसल के लिए बीमा योजना का किसानों को लाभ मिलेगा।
-मदन गोपाल सिंह
मुख्य जिला कृषि अधिकारी सांबा