अरनिया। आरएस पुरा सबडिवीजन में सरसों की खेती ने इस साल नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
कृषि विभाग के प्रयासों और किसानों की मेहनत से इस साल सरसों का रकबा पिछले साल के 100 हेक्टेयर से बढ़कर 500 हेक्टेयर हो गया है, जो पांच गुना वृद्धि दर्शाता है। विभाग ने अगले साल इसे 1000 हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।
सरसों की खेती से किसानों को दोहरा फायदा हो रहा है। एक ओर, इसकी पैदावार लगभग 120 दिन में तैयार हो जाती है, जिससे किसान साल में तीन फसलें (सरसों, गेहूं और धान) ले पा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर, बाजार में सरसों का भाव 6000-7000 रुपये प्रति क्विंटल मिलने से आमदनी भी बढ़ी है। कृषि विभाग ने किसानों को आधुनिक बीज उपलब्ध कराए हैं, जिसमें मुफ्त बीज वितरण भी शामिल है।
गांव आल्हा निवासी किसान केके शर्मा ने बताया कि सरसों की खेती से खर्च कम और मुनाफा ज्यादा मिल रहा है। अब हम साल में तीन फसलें ले पा रहे हैं। वहीं गांव बड्डियाल के सुशील कुमार ने कहा कि उन्होंने पहली बार सरसों की खेती की है। अन्य फसलों के मुकाबले इसमें बीमारियां कम और मुनाफा ज्यादा है। (संवाद)
वर्जन
किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए विभाग ने न केवल बीज वितरित किए, बल्कि तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य अगले साल सरसों का रकबा दोगुना करके किसानों की आय बढ़ाना है।
-सुरेंद्र गुप्ता, एग्रीकल्चर ऑफिसर सब-डिविजनल
क्यों फायदेमंद है सरसों की खेती
कम लागत : गेहूं की तुलना में खर्च आधा
कम समय : 120 दिन में फसल तैयार
बेहतर बाजार भाव : 6000-7000 रुपये/क्विंटल
जलवायु अनुकूल : कम पानी और रोग-प्रतिरोधक क्षमता
............
विभाग ने आरएच 725 सरसों के बीज की वैरायटी को आवंटित किया
कृषि विभाग की ओर से पिछले तीन साल से आरएच 725 सरसों के बीज की वैरायटी को आवंटित किया जा रहा है। उक्त बीज फसल की उत्तम पैदावार के साथ-साथ बीमारी रहित है। फ्लोरिंग स्टेज में पहुंचने पर सरसों की फसल को भरपूर फल मिल चुका होता है। इसके चलते फसल की बंपर पैदावार होती है। ऑयल सीड्स किसानों के लिए फायदेमंद खेती है। इसके चलते कृषि विभाग ने मिशन मोड़ पर काम करने के बाद किसानों को जागरूक करते हुए आरएसपुरा सब डिवीजन में सरसों की फसल को 500 हेक्टेयर तक पहुंचा दिया है।