पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के घर में सुरक्षा को तोड़कर घुसने के आरोप में मारे गए सैयद मुरफाद शाह का परिवार नई दिल्ली में राष्ट्रीय मानवाधिकार का दरवाजा खटखटाएंगे। परिवार के लोगों में एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने के कारण रोष है। कोर्ट के आदेशों के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
मुरफाद के भठिंडी में पहुंचने का सवाल अभी तक जस की तस है। इस मामले की मजिस्ट्रेट जांच चल रही है। पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 176 के तहत केस की जांच मजिस्ट्रेट को सौंपने की गुजारिश की। चार अगस्त को हुए हादसे के बाद मुरफाद के खिलाफ के दो एफआईआर दर्ज की गईं। दोमाना थाने में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने वालों के खिलाफ भी अलग से मामला दर्ज किया गया है।
परिवार के लोग सब रजिस्ट्रार की कोर्ट में अर्जी दे चुके हैं। सब रजिस्ट्रार ने पुलिस को शुक्रवार को मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। तीन दिन बीत जाने के बाद भी मुरफाद के पक्ष में कोई मामला दर्ज नहीं किया है।
मुरफाद की पिता के अनुसार अब उनके पास नई दिल्ली जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। हाईकोर्ट में भी पुलिस के खिलाफ आवेदन करने की तैयारी है। उन्हें एसडीएम की जांच पर शक है और निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने की मांग की। फिलहाल, इस मामले में राज्य मानव अधिकार आयोग ने पुलिस को 10 सितंबर तक जवाब पेश करने के आदेश दिए हैं।