सांबा के रामगढ़ के जीरो लाइन पर लगा मेला
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सांबा जिले के रामगढ़ में भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा की जीरो लाइन पर वीरवार को बाबा चमलियाल का मेला लगा। बीएसएफ के अधिकारियों ने चादर चढ़ाने की रस्म निभाई। इसके बाद यहां पहुंचे लाखों लोगों ने माथा टेका। भारत पाकिस्तान के विभाजन के बाद रामगढ़ की सीमा काफी अस्थिर रही है। सीमा के पास बसे लोगों ने गोलीबारी और बमबारी को सहन किया है।
शत्रुता के बावजूद यह मेला दोनों देशों के लोगों को मिलाता आया है। बाबा चमलियाल के स्थान के प्रति पाकिस्तान के लोगों में बहुत आस्था है। पाकिस्तान की तरफ भी एक सप्ताह तक मेले का आयोजन होता है। बाबा दलीप सिंह मन्हास के दोनों स्थान चमलियाल व सैंदावाली, जो अब पाकिस्तान में है, एक साथ बाबा के जीवन व कार्यों के उत्सव के लिए लोकप्रिय बन गए हैं।
बीएसएफ अधिकारियों के साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी टेका माथा
उपायुक्त सांबा अभिषेक शर्मा, एसएसपी बेनाम तोश, अतिरिक्त एसपी सुरिन्द्र चौधरी, पूर्व मंत्री चन्द्र प्रकाश गंगा, डीडीसी अध्यक्ष केशव शर्मा, पूर्व मंत्री मंजीत सिंह, प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष बिललु चौधरी ने भी बाबा की मजार पर मात्था टेका। इलाहाबाद यूपी से आई महिला सुमित्रा ने बताया कि वह पहली बार बाबा के दशर्न के लिए आई हैं।
वह सांबा आई थीं तो उन्हें बताया गया कि यहां कि शक्कर और शर्बत से चर्म रोग में आराम मिलता है। छतीसगढ़ की सुकबरा ने बताया कि वह दूसरी बार आई हैं और अभी जम्मू में रहती हैं। उन्हें भी चर्म रोग है। हरियाणा के चरखी दादरी से पहुंचे मोहन सिंह ने कहा कि उनका एक रिस्तेदार सेना में था। उन्होंने हमें यहां का महत्व बताया था। इस बार वह तीसरी दफा यहां आए हैं। अब चर्म रोग में उन्हें काफी आराम है।
त्वचा रोग ठीक होने की उम्मीद से पहुंचते हैं लोग
बाबा चमलियाल की दरगाह की शक्कर और शर्बत में औषधीय गुण होने का दावा किया जाता है। यह औषधीय गुण ऐसे हैं जिनसे त्वचा रोग में आराम मिलता है। चर्म रोग वाले लोग यहां शक्कर और शर्बत लेने के लिए आते हैं। अधिकांश मरीज कई दिनों तक यहां रहकर शक्कर और शर्बत का उपयोग करते हैं।
दरगाह की स्थापित प्रथा के अनुसार मरीज को कम से कम 21 दिन तक लेप लगाना होता है। गंभीर रोग पर लोग यहां रहकर कई महीने तक लेप लगाते हैं। मरीजों के ठहरने के लिए यहां कमरे बनाए गए हैं।