दशमी पर फगेत्रा बिरादरी की मेल का आयोजन, रविवार होने के चलते उमड़ी भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। सीमावर्ती गांव चंगिया में रविवार को फगेत्रा बिरादरी के लोगों ने जय दाती मां के दरबार में माथा टेककर आशीर्वाद ग्रहण किया है। दाती मां के दरबार में महीने की हर दशमी पर मेल का आयोजन किया जाता है। दशहरा के दिन मुख्य वार्षिक मेल का आयोजन किया जाता है। रविवार को दशमी के मौके पर बिरादरी के अलावा आसपास और दूरदराज के क्षेत्र से आए लोगों ने श्रद्धापूर्वक दाती मां के दरबार में माथा टेककर कुल की कामना के लिए प्रार्थना की है।
रविवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने दाती मां के दरबार में माथा टेक कर आशीर्वाद ग्रहण किया है। इस मौके पर प्रबंधकों और जय दाती मां दरबार के सेवकों की तरफ से रविवार सुबह देवस्थान का हार-शृंगार किया गया। इसके बाद विधिपूर्वक मंत्र उच्चारण के साथ आरती की गई। जय दाती मां को रस्म के अनुसार भोग लगाया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए दाती मां के दरबार को खोल दिया गया। जय दाती मां के दरबार में रविवार सुबह से ही बिरादरी के लोगों का आना-जाना शुरू हो गया था। बिरादरी के लोगों की तरफ से नवविवाहित जोड़ों के विधिपूर्वक रस्म भी दाती मां के दरबार में निभाई जाती है। इसके अलावा मेल के आयोजन पर बच्चों के मुंडन भी बिरादरी के लोग करवाते हैं। जय दाती मां कमेटी के प्रबंधकों की तरफ से दशमी पर मेल के मौके पर पुख्ता बंदोबस्त किए गए थे। आशीर्वाद ग्रहण करने आए श्रद्धालुओं के लिए लंगर का आयोजन किया गया था। जय दाती मां दरबार में माथा टेककर आशीर्वाद ग्रहण करने के बाद श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। जय दाती मां के प्रबंधकों ने मां के दरबार में रविवार को लंगर में पूरी छोले, खिचड़ी, हलवा और चाय विशेष तौर पर लगाई थी। लंगर ग्रहण करने के बाद श्रद्धालु प्रसाद के तौर पर खिचड़ी अपने घरों में भी ले जाते हैं। जय दाती मां के सेवक सुदेश कुमार गुप्ता ने बताया कि सच्चे मन से प्रार्थना करने पर दाती मां लोगों की झोलियां भर देती है। उन्होंने कहा कि दाती मां के दरबार में सेवक के रूप में अपनी सेवा दे रहे हैं। दाती मां के आदेश अनुसार जहां पर भी उनकी ड्यूटी होती है। वह बखूबी दाती मां का निर्देश समझकर निभाते हैं। उन्होंने कहा कि दाती मां अपने सेवकों पर अपार कृपा बनाए रखती हैं। इस मौके पर जय दाती मां के सेवक पवन कुमार गुप्ता ने बताया कि मेल के आयोजन से एक दिन पहले ही वह दाती मां के दरबार में पहुंच जाते हैं। प्रबंधकों के साथ मिलकर पूरी व्यवस्था का निरीक्षण करते हैं। उन्होंने कहा कि दाती मां के दरबार में पहुंचकर उनकी सारी चिंताएं खत्म हो जाती हैं।