रामबन। गुज्जर-बक्करवाल समेत जनजातीय समुदाय के लोगों की मवेशियों के साथ पहाड़ों से मैदानों में वापसी वाहनों के जरिए होगी। रामबन जिला प्रशासन ने जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे से इन समुदायाें की मवेशियों के साथ पैदल आवाजाही पर रोक लगा दी है। जनजातीय परिवारों के लिए 50 ट्रक उपलब्ध रहेंगे। इन्हीं वाहनों से जनजातीय परिवाराें को माल-मवेशियों के साथ मैदानों में वापसी करवाई जाएगी।
रामबन जिला मजिस्ट्रेट की ओर से जारी आदेश का हवाला देते हुए अधिकारियों ने बताया कि एसडीएम बनिहाल जाहिर अब्बास को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। सर्दी से पहले जनजातीय परिवारों की वापसी की प्रक्रिया को नोडल अफसर देखेंगे। परिवहन सुविधा उपलब्ध होने से जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर जाम नहीं लगेगा। सड़क परिवहन निगम के अफसरों के नंबर हेल्पलाइन के तौर पर काम करेंगे। हर साल जनजातीय समुदायों के लाखों परिवार अपने माल मवेशियों के साथ स्थान बदलते हैं। मुख्य रूप से गुज्जर-बक्करवाल अप्रैल-मई में पहाड़ों का रुख करते हैं, जबकि सर्दी से पहले मैदानों में वापसी करते हैं। मई माह में जनजातीय मामले विभाग की ओर से पहली बार इन परिवारों को परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाई गई थी। पैदल सफर में इन लोगों को 20 से 30 दिन का समय लगता है, जबकि परिवहन सुविधा मिलने से यह सफर दो दिन में पूरा हो जाता है।