अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। बरसात के साथ शहरवासी वायरल कंजेक्टिव वाइट्स (आई फ्लू) की चपेट में आ रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में प्रत्येक दस में से 3-4 मामले आई फ्लू के आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आगामी दिनों में बीमारी का प्रभाव बढ़ेगा। कोविड के दौरान सामाजिक दूरी के कारण वायरल संक्रमण का प्रभाव कम देखा था। मगर अब सामाजिक दूरी का पालन न होने से आई फ्लू जैसे वायरल रोग पनप रहे हैं। संक्रमित के संपर्क में आने से बीमारी फैल रही है। आंखें ठीक होने में पांच से सात दिन लग रहे हैं।
हालांकि हर साल सीजनल आई फ्लू सर दिखाता है। जीएमसी की 225 की नेत्र ओपीडी में 20 से 25 प्रतिशत मामले आई फ्लू के हैं। नेत्र विभाग के एचओडी डॉ. अशोक शर्मा ने बताया कि थोड़ी सी सफाई से बीमारी से बचा जा सकता है। आई फ्लू एडिनो वायरस आंखों को खराब करता है। वायरल कंजेक्टिव वाइटस के दौरान अधिकांश लोग खुद ही आंखों का इलाज करना शुरू कर देते हैं, जो कई बार नुकसानदायक होता है। वायरल कंडेक्टिव वाइटस हवा में सक्रिय रहता है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी इलाकों को वायरल प्रभावित करता है। अधिकांश स्कूली बच्चों से घरों तक पहुंचकर अभिभावकों और परिवार के सदस्यों को चपेट में लेता है। नेत्र विशेषज्ञ डॉ. प्रणव गुप्ता ने बताया कि लोगों की ओर से बीमारी से बचाव के लिए बोरिक एसिड का ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है, जो कई बार नुकसान पहुंचाता है।
घबराने की जरूरत नहीं, समय पर इलाज करवाएं
गांधीनगर अस्पताल की 80 के करीब नेत्र ओपीडी में 30 तक आई फ्लू के पीड़ित पहुंच रहे हैं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीण योगराज के अनुसार आई फ्लू से घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसका समय पर इलाज लेना जरूरी है। कई बार इलाज में देरी से आंखें अधिक खराब होने की आशंका रहती है।
लक्षण - आंखों में खारिश, लाली छाना। पलकों में सूजन, तेज दर्द। आंखों में लगातार पानी चलना।
बचाव - पीड़ित दूसरों के संपर्क में न आए। आंखों पर चश्मा लगाकर रखें। कंप्यूटर, टीवी और मोबाइल आदि को न देखें। आंखों में खारिश न करें। रूमाल और तोलिया दूसरे को न दें। दवाई डालने के बाद हाथों को साफ रखें। पीड़ित बच्चे को स्कूल में न भेजें।