जम्मू। जलवायु परिवर्तन के कारण 21वीं सदी के अंत तक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 6.9 डिग्री तक तापमान में वृद्धि हो सकती है। इस प्रक्रिया से हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियर 85 फीसदी तक सिकुड़ सकते हैं। यह दावा जलवायु परिवर्तन नामक पत्रिका में प्रकाशित लेख में किया गया है।
अविभाजित जम्मू-कश्मीर के पूरे क्षेत्र पर आधारित अध्ययन में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित व बाल्टिस्तान, अक्साई चिन और नियंत्रण रेखा के पार के अन्य क्षेत्र शामिल हैं। कश्मीर विश्वविद्यालय में डीन व शोध के प्रमुख लेखक प्रो. शकील अहमद रोम्शू ने बताया कि औसत वार्षिक तापमान में 4.5 डिग्री, 3.98 डिग्री और क्रमश: तीन अलग-अलग परिदृश्यों में इक्कीसवीं सदी के अंत तक 6.93 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि का अनुमान है। जम्मू और कश्मीर हिमालय के लिए 6.9 डिग्री सेल्सियस की तापमान वृद्धि सदी के अंत तक वैश्विक और राष्ट्रीय तापमान में अनुमानित औसत वृद्धि से अधिक है। ग्रीनहाउस गैसों की वर्तमान उत्सर्जन दर जारी रहने पर वैश्विक औसत तापमान 5 डिग्री और भारत में औसत तापमान 4.4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। इससे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। कश्मीर विश्वविद्यालय के पृथ्वी विज्ञान विभाग में प्रोफेसर रोम्शू ने कहा क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण संसाधन ग्लेशियरों के सदी के अंत तक लगभग 85 प्रतिशत तक सिकुड़ने का अनुमान है। इससे सिंधु बेसिन में जल प्रवाह में भारी कमी आएगी, जिसका पानी दक्षिण एशिया के कई देशों के बीच साझा किया जाता है। इस अध्ययन में 21वीं सदी के अंत तक तीन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन परिदृश्यों के तहत 11 मॉडलों के एक संयोजन का उपयोग किया गया था, जो जलवायु क्षेत्रों के वितरण में परिवर्तन पर भी प्रकाश डालता है।
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कृषि, बागवानी, पर्यटन पर प्रभाव
जलवायु परिवर्तन से कृषि, बागवानी और पर्यटन क्षेत्र पर भी प्रभाव पड़ेगा। इससे इन क्षेत्र में आश्रित आबादी की आजीविका को खतरा होगा। पृथ्वी विज्ञान विभाग, कश्मीर विश्वविद्यालय से जसिया बशीर और इरफान रशीद सहित शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया कि जलवायु परिवर्तन के चालक मुख्य रूप से वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की बढ़ती उत्सर्जन दर हैं। ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन सीधे तौर पर ईंधन के उपयोग, औद्योगीकरण, वनों की कटाई, वायु प्रदूषण और अन्य पर्यावरणीय गतिविधियों से है।
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ठंडे जलवायु क्षेत्र में 22 प्रतिशत की कमी
शोधकर्ताओं ने अध्ययन में उल्लेख किया कि लद्दाख क्षेत्र में ठंडे जलवायु क्षेत्र में 22 प्रतिशत की कमी होगी। 21वीं सदी के अंत तक जलवायु और जलवायु क्षेत्रों में अनुमानित बदलावों से इस क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा, जो पुनर्वितरण और वनस्पति की संरचना में परिवर्तन, बर्फ की कमी और ग्लेशियर में गिरावट को बढ़ा सकते हैं।