2016 की निशानदेही का रिकॉर्ड और अब के रिकॉर्ड में असमंजस
पटवारी के अनुसार, हदबंदी की निशानी ऊपर नीचे होने से 30 फुट तक आ रहा फर्क
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। सुचेतगढ़ तहसील के गांव शेर-ए-चक में रास्ते पर अतिक्रमण को लेकर राजस्व रिकॉर्ड में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। वीरवार को पटवारी मोहम्मद यूनिस ने अतिक्रमण वाले रास्ते की पैमाइश की, लेकिन उन्हें गांव की हदबंदी ही पता नहीं चल पाई। उन्होंने फीते से चार बार पैमाइश की, और अंत में बताया कि सुचेतगढ़ तहसील के राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार रास्ता अंकित नहीं हो पा रहा है। यह जमीन सरकार की है, परंतु हदबंदी की निशानी कहीं आगे पीछे हो गई है, जिसके चलते 30 से 35 फुट का फर्क आ रहा है।
उन्होंने कहा कि अरनिया और सुचेतगढ़ तहसील के अधिकारियों की मौजूदगी में हदबंदी करने के बाद रास्ते की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। वहीं, दूसरी ओर गांव के लोगों ने बताया कि 2016 में जिला मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद नायब तहसीलदार अरनिया, नायब तहसीलदार सुचेतगढ़ दोनों के पटवारी, गिरदावर और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में रास्ते की निशानदेही की गई थी। उन्होंने बाकायदा उस समय की तैयार की गई रिपोर्ट में सबकुछ अंकित किया था। और सारी रिपोर्ट तहसीलदार अरनिया द्वारा सत्यापित की गई है, और उस पर रास्ते का नक्शा बनाया गया है, जो दर्शाता है कि इस जगह पर रास्ता मौजूद है।
ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में 7 साल बाद ही इतना फर्क क्यों आ गया है। इस पर भी सोच विचार करने की जरूरत है। अगर पहले निशानदेही हुई है तो वह भी रिकॉर्ड के मुताबिक ही हुई है। इसलिए, राजस्व विभाग के अधिकारी इस मुद्दे पर खुद हस्तक्षेप करें और अतिक्रमण वाले रास्ते को रिकॉर्ड के अनुसार दर्ज करें।
पटवारी ने पैमाइश कर ली है, और रिपोर्ट बना दी है। लेकिन, मेरे पास अभी तक रिपोर्ट नहीं पहुंची है। जैसे ही रिपोर्ट मेरे पास पहुंचती है तो उस पर गौर किया जाएगा। अगर, राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार रास्ता अंकित होता है तो उसको बहाल भी किया जाएगा।
- निर्भय शर्मा, तहसीलदार, सुचेतगढ़