- जेडीए में 1.60 करोड़ 250 कर्मियों की पगार पर हर माह हो रहा खर्च, विकास शून्य
- अतिक्रमण से पांच परियोजनाओं का काम प्रभावित
- मुट्ठी में 144 फ्लैट देने के बाद नया प्रोजेक्ट शुरू नहीं, सिद्दड़ा में भी रुका पार्क, फ्लैट व प्रोजेक्टों का काम
सतीश वालिया
जम्मू। जम्मू डेवलपमेंट अथॉरिटी (जेडीए) की सुस्त चाल से शहर में प्रोजेक्ट अधूरे हैं, क्योंकि 92 हजार कनाल जमीन में से 52 हजार से अभी तक अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका है। जेडीए के पास 250 कर्मियों की फौज है। इनके वेतन पर हर माह 1.60 करोड़ रुपये जा रहे हैं, लेकिन विकास की रफ्तार तेजी नहीं पकड़ रही। साल 2015 से कोटभलवाल, गोल गुजराल, रूप नगर, बीरपुर में कॉलोनी काटी गई है। कुछ प्लाट जारी कर दिए हैं। घर बन चुके हैं, लेकिन यहां जेडीए नालियां, बिजली, सड़कें और अन्य सुविधाएं नहीं दे पाया है। कारण अतिक्रमणकारी काम नहीं करने दे रहे हैं।
कोटभलवाल में अतिक्रमण है। यहां 300 से ज्यादा प्लाट मिलने हैं। लेकिन, करीब 100 लोगों को ही मिल पाए हैं। इसी तरह गोल गुजराल में 330 प्लाट दिए जाने हैं। अभी 290 ही मिले हैं। रूपनगर और बीरपुर में भी क्रमश: 730 और 162 प्लाट मिलने हैं। इसमें भी आधे लोगों को ही प्लाट मिले हैं।
सिद्दड़ा में जेडीए की 300 कनाल से ज्यादा जमीन है। यहां बीते साल पार्क और फ्लैट बनाने का प्रस्ताव बना था, मगर अतिक्रमण के कारण काम बंद है। 2019 में महाराजा हरि सिंह पार्क बनने के बाद से नया कोई पार्क नहीं बन पाया है। जम्मू हेविटेट सेंटर के लिए डीपीआर 2018 में भेजी गई थी। अभी इस परियोजना को अनुमति नहीं मिली है। विक्रम चौक से तवी पुल तक 100 कनाल जमीन में परियोजना पर काम होना था।
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जेडीए की जमीन पर 53 अवैध कॉलोनियां
सरकार की ओर से जेडीए को जमीन समय-समय पर ट्रांसफर होती रही है, मगर इसमें पहले से ही अतिक्रमण था। इस कारण जेडीए लगभग 20 हजार कनाल जमीन पर कोई काम नहीं कर पाया है। ये जमीन 2004 में मिली थी। वहीं, जेडीए की जमीन पर करीब 35 अवैध कॉलोनियां भी हैं। मास्टर प्लान लागू होने के बाद जमीन की पैमाइश की गई तो इसका पता चला। इन कॉलोनियों को अब नगर निगम हटाने की तैयारी में हैं।
जेडीए के प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं होते हैं। इस कारण शहर के लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। जेडीए को तेज रफ्तार से विकास करवाना चाहिए।
-चंदन गुप्ता, अध्यक्ष, मोती बाजार एसोसिएशन
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त्रिकुटा नगर सहित अन्य कालोनियों में मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। कई जगहों में अतिक्रमण है। इस कारण विकास नहीं हो पा रहा है।
-राजन गुप्ता, दुकानदार, बस स्टैंड
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जेडीए की जमीन में अतिक्रमण है। इसे हटाया जा रहा है। अथॉरिटी अपने स्तर पर भी कार्रवाई कर रही है। कुछ मामले कोर्ट में चल रहे हैं।
-डॉ.विवेक मोदी, निदेशक, लैंड मैनेजमेंट जेडीए