प्रदर्शन करते होटल नेडोज के कर्मचारी। संवाद
गुलमर्ग स्थित ऐतिहासिक होटल नीडोज़ के सरकारी अधिग्रहण से लगभग 100 कर्मचारी बेरोज़गार हो गए हैं। जिनमें से कई ने इस प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान को दशकों तक अपनी सेवाएं दी थीं।
आजीविका का कोई वैकल्पिक साधन न होने पर कर्मचारियों ने बुधवार को श्रीनगर में न्याय और पुनर्वास की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने हाथों में हमें न्याय दो, हमारे अधिकार मत छीनो, हमारे परिवारों को बचाओ की तख्तियां हाथों में ली हुई थी।
श्रीनगर के शेर ए कश्मीर पार्क में अपने लिए न्याय की गुहार लगाते हुए कर्मचारी अब्दुल रहमान मीर ने कहा, मैं 1971 में नीडोज़ होटल में आया था और तब से काम कर रहा था। मेरी पांच बेटियां हैं जिनमें से दो की शादी अभी करनी है। एक दम से नोटिस दे दिया और सील कर हमें बेरोज़गार बना दिया। अब हम इस उम्र में कहा जाएंगे।
होटल के मैनेजर ने कहा, मैं 20 वर्षों से होटल में बतौर मैनेजर काम कर रहा हूं। हमें कोई नोटिस जारी नहीं हुआ, अचानक पर्यटन विभाग, जीडीए और पुलिस आई और होटल सील किया गया। करीब 100 से अधिक कर्मचारी हैं, हमारा सामान भी अंदर है। उन्होंने कहा कि होटल 1888 में बना है। शेख अब्दुल्ला पैदा भी नहीं हुए थे। डॉ. फारूक और उमर अब्दुल्ला की बात ही नहीं। फिर सियासी रंग क्यों दिया जा रहा है जैसा कि सुनने में आया है। एलजी, मुख्यमंत्री से गुज़ारिश की कि हमारे साथ इंसाफ किया जाए।
गौरतलब है कि गुलमर्ग में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के ससुराल वालों के स्वामित्व वाले प्रसिद्ध नीडोज़ होटल को 137 साल बाद शनिवार को नोटिस दिया गया और सोमवार को उसे सील कर दिया गया।