दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद के कांग्रेस से इस्तीफे के बाद जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस को लग रहे एक के बाद एक बड़े झटकों से आगामी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार तक खड़े करना पार्टी के लिए चुनौती बन गया है। प्रदेश में आखिरी विधानसभा चुनाव 2014 में हुए थे। उसमें कांग्रेस 12 सीटों के साथ जम्मू कश्मीर में चौथे नंबर पर सिमट गई थी। अब उन 12 पूर्व विधायकों में से 11 कांग्रेस का साथ छोड़ चुके हैं।
गुलाम नबी आजाद के समर्थन में पूर्व विधायक गुलाम मोहम्मद सरूरी, सूरनकोट से पूर्व विधायक चौधरी अकरम, देवसर से पूर्व विधायक मोहम्मद अमीन भट कांग्रेस को अलविदा कह चुके हैं। वहीं कांग्रेस के तीन पूर्व विधायक जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी में 2021 में शामिल हो गए थे। इनमें गूल अरनास से पूर्व विधायक एजाज अहमद खान, गुलाब गढ़ विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक मुमताज अहमद और बांदीपोरा के पूर्व विधायक उस्मान मजीद शामिल है।
वहीं, अनुच्छेद 370 की समाप्ति व जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद लद्दाख के बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनने से कांग्रेस के तीन पूर्व विधायकों का सियासी कैरियर पहले ही खत्म हो चुका है। ऐसे में 2014 विधानसभा का केवल एक ही विधायक विकार रसूल वानी ही कांग्रेस के पास बचे हैं। विकार रसूल वानी वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हैं।
ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पास उम्मीदवार खड़े करने के लिए नेता नहीं रहने से बड़ी चुनौती पैदा हो गई है। इस सवाल पर विकार रसूल वानी का कहना है कि प्रदेश में जो कांग्रेस बची है। वह पूरे दम के साथ सोनिया गांधी और राहुल गांधी के सिपाही की तरह काम करेगी। राजनीति में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और इसके लिए हम तैयार हैं।