- घाटी की दो दर्जन सीटों पर दिलचस्प होगा मुकाबला,
शशांक मिश्र
जम्मू। सियासत के नए सूरमा खूबसूरत कश्मीर और चिनाब घाटी के दिग्गजों का खेल बिगाड़ने की फिराक में हैं। दक्षिण कश्मीर 16 और जम्मू संभाग की आठ सीटों पर बुधवार को मतदान होगा। सबसे ज्यादा सात सीटें अनंतनाग और सबसे कम दो-दो सीटें शोपियां और रामबन जिले की हैं। अनुच्छेद 370 की सियासत में तप रही घाटी में मतदान का पहला चरण भले ही भाजपा के लिए कम उत्साहजनक है, मगर, कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन, पीडीपी, इंजीनियर रशीद की अवामी इत्तेहाद पार्टी और जमात-ए-इस्लामी से जुड़े निर्दलीय परिणाम में उलटफेर की फिराक में हैं। फिलहाल, मतदान से पहले सभी राजनीतिक पार्टियों और प्रत्याशियों ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार हो रहे विधानसभा चुनाव में दिग्गजों के सामने कई नए दल किस्मत आजमाने उतरे हैं। वर्ष 2014 के चुनाव में भले ही पीडीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, मगर भाजपा ने सबसे ज्यादा मत प्रतिशत प्राप्त किया था। ऐसे में इस बार छोटे दलों की मौजूदगी में मतदाताओं को रिझाने से लेकर जीत दर्ज करने की राह कठिन हो सकती है। पिछले कुछ वर्षों के मत प्रतिशत के ट्रेंड से यह साफ है कि भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से कश्मीर घाटी में अमूमन वोटिंग प्रतिशत जम्मू के मुकाबले कम ही रहा है। मगर, इस बार अनुच्छेद 370 का मुद्दा यहां काफी गरमाया हुआ है।
फिलहाल, जम्मू-कश्मीर के सियासी मैदान में 20 से अधिक दल ऐसे हैं जो नए और बहुत छोटे हैं। अनारक्षित समाज पार्टी, भीम सेना, भारतीय संपूर्ण क्रांतिकारी पार्टी, लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी, हिंदोस्तान शक्ति सेना, सैनिक समाज पार्टी, आल इंडिया फार्व्ड ब्लाक जैसे कई दल सामने आए हैं। इतना ही नहीं, लोकसभा चुनाव में यूपी के परिणाम से उत्साहित समाजवादी पार्टी भी यहां के सियासी समर में कूद पड़ी है। यहां बता दें कि जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। 2014 चुनाव में पीडीपी ने सबसे ज्यादा 28 और भाजपा ने 25 सीटें जीती थी। दोनों पार्टियों ने मिलकर सरकार बनाई थी। इस बार का सियासी समीकरण पूरी तरह से बदला हुआ है।
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23.27 लाख मतदाता करेंगे 219 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला
पहले चरण में बुधवार को 7 जिलों की 24 विधानसभा सीटों 23.27 लाख मतदाता 219 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे। एक दशक बाद हो रहे विधानसभा चुनाव में नए दलों के सियासी भविष्य का भी निर्णय होना बाकी है। डोडा, रामबन और किश्तवाड़ जिले जम्मू डिवीजन जबकि अनंतनाग, पुलवामा, कुलगाम और शोपियां कश्मीर डिवीजन में हैं। पुलवामा की पांपोर सीट पर सबसे ज्यादा 14 और अनंतनाग की बिजबिहाड़ा सीट पर सबसे कम तीन प्रत्याशी मैदान में हैं।
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हर चुनाव में बदले हैं समीकरण
वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में परिसीमन के बाद सियासी समीकरण भी बदले हैं। वर्ष 2014 के चुनाव में दक्षिण कश्मीर व चिनाब वैली की 22 सीटों में माकपा ने भी अपना खाता खोला था। यहां सबसे बड़ी जीत पीडीपी ने दर्ज की और 11 सीट पर कब्जा जमाया था। भाजपा ने इस इलाके में चार सीट पर विजय दर्ज की। नेकां ने दो सीट पर कब्जा किया था। इस वर्ष के चुनाव में डोडा और किश्तवाड़ जिले में एक एक सीट बढ़ गई है। वर्ष 2014 के चुनाव में कांग्रेस ने देवसर और बनिहाल पर जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा ने डोडा और भद्रवाह सीट पर कब्जा किया था। वर्ष 2008 में कांग्रेस ने देवसर को छोड़कर बाकी सभी सीटें जीती थीं। देवसर को पीडीपी ने जीता था।
एक नजर में वर्ष 2014 में मिले मत प्रतिशत
पार्टी सीट मत प्रतिशत
पीडीपी 28 22.67
भाजपा 25 22.98
नेशनल कांफ्रेंस 15 20.77
कांग्रेस 12 18.01
पीपुल्स कांफ्रेंस 02 1.93
सीपीआईएम 01 0.05
पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट 01 0.72
निर्दलीय 03 6.85
स्रोत- चुनाव आयोग की वेबसाइट
भाजपा पहले चरण के मतदान में शानदार प्रदर्शन के लिए तैयार है। हम जिन मुद्दों को लेकर जम्मू और कश्मीर के चुनावी मैदान में है। जनता का भरपूर प्यार मिल रहा है।
तरुण चुघ, राष्ट्रीय महासचिव, भाजपा
कांग्रेस गठबंधन जम्मू कश्मीर के जरिये पूरे देश को नया संदेश देगी। हमारा चुनाव अभियान बहुत सकारात्मक रहा है और जनता पहले चरण के मतदान में ही झूठ की सियासत को नकार देगी।
मोहन प्रकाश, राष्ट्रीय प्रवक्ता, कांग्रेस