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Jammu News: हरित उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए औषधीय पौधों की खेती पर मंथन

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बीजीएसबीयू में विशेषज्ञों ने संरक्षण आधारित खेती, ग्रामीण आजीविका और बाजार संचालित अवसरों पर दिए सुझाव
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संवाद न्यूज एजेंसी
राजोरी। बाबा गुलाम शाह बादशाह विश्वविद्यालय (बीजीएसबीयू) राजोेरी में हरित उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए औषधीय पाैधों की खेती पर चर्चा की गई। बीजीएसबीयू के सेंटर फॉर बायोडायवर्सिटी स्टडीज ने शुक्रवार को रीजनल कम फेसिलिटेशन सेंटर के सहयोग से वर्कशॉप करवाई।
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विश्वविद्यालय के वीसी प्रो. जावेद इकबाल ने क्षेत्र की अनुकूल कृषि-जलवायु परिस्थितियों के कारण औषधीय पौधों की खेती की अपार संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि औषधीय पौधों का व्यवस्थित प्रचार ग्रामीण रोजगार, आय विविधीकरण और पारिस्थितिक बहाली का एक प्रमुख चालक बन सकता है। रजिस्ट्रार अभिषेक शर्मा ने वैज्ञानिक अनुसंधान को जमीनी स्तर पर लागू करने में विश्वविद्यालयों की भूमिका के बारे में बताया। उन्होंने छात्रों और किसानों को वैज्ञानिक खेती के तरीके अपनाने और आय बढ़ाने के लिए मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, विपणन के रास्ते तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया। सेंटर फॉर बायोडायवर्सिटी स्टडीज के प्रभारी निदेशक डॉ. श्रीकर पंत ने पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों में औषधीय पौधों के बढ़ते महत्व और फार्मास्युटिकल और हर्बल उद्योगों में उनकी बढ़ती मांग पर प्रकाश डाला। उन्होंने जैविक संसाधनों के स्थायी उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए संरक्षण रणनीतियों को उद्यमिता के साथ एकीकृत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बायोसाइंसेज एंड बायोटेक्नोलॉजी के एसोसिएट डीन डॉ. एए शाह ने जैव विविधता संरक्षण और स्थायी आजीविका में औषधीय पौधों की खेती की भूमिका के बारे में बताया। अनुसंधान-संचालित उद्यमिता को बढ़ावा देने में शिक्षा जगत की जिम्मेदारी की पुष्टि की।
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