आईआईटी का छठा दीक्षांत समारोह संपन्न, 386 छात्र-छात्राओं को मिली डिग्री
इनमें 211 बीटेक, 114 एमटेक, 25 एमएससी और 36 पीएचडी के छात्र
प्रेसिडेंट्स गोल्ड आश्रय, डायरेक्टर्स गोल्ड मेडल स्नेहा बृजकिशोर ने जीता
तकनीकी के क्षेत्र में दुनिया भर के अवसरों का लाभ उठाएं : कल्याणरमन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। आईआईटी जम्मू का छठा दीक्षांत समारोह शनिवार को संपन्न हुआ। इसमें कुल 386 होनहारों को डिग्री और पदक प्रदान किए गए। पदक पाने वाले छात्रों के चेहरों पर अलग ही चमक थी। उनका उत्साह सातवें आसमान पर नजर आ रहा था।
इंस्टीट्यूट गोल्ड एमटेक सिविल इंजीनियरिंग के छात्र साकिब रशीद वानी ने जीता। प्रेसिडेंट्स गोल्ड मेडल बीटेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के छात्र आश्रय गुप्ता ने अपने नाम किया। डायरेक्टर्स गोल्ड मेडल की हकदार बीटेक मैटीरियल इंजीनियरिंग की छात्रा स्नेहा बृजकिशोर बनीं।
जिन प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को डिग्री और पदक प्रदान किए गए। इनमें 211 बीटेक, 114 एमटेक, 25 एमएससी और 36 पीएचडी छात्र शामिल थे। पीएचडी के 16, एमएससी के 10, एमटेक के 35, जबकि बीटेक के 60 छात्र समारोह में शामिल नहीं हो सके। उनकी डिग्रियां उनके स्थानापन्न ने ग्रहण की।
समारोह में बतौर मुख्य अतिथि अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन ने शिरकत की।
डॉ. कल्याणरमन ने ग्रेजुएट्स को दुनिया भर से मिल रहे तकनीकी अवसरों का बढ़कर लाभ उठाने का आग्रह किया। साथ ही उनसे आईआईटी जम्मू से आगे भी जुड़े रहने की बात कही, ताकि उनकी विशेषज्ञता का लाभ आने वाले छात्रों को मिल सके। उन्होंने छात्रों से अपने अनुभव को आधार बनाकर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने को कहा।
आईआईटी जम्मू के निदेशक प्रो. मनोज सिंह गौर ने कहा कि दृढ़ संकल्प और इनोवेशन से सभी सीमाओं को पार किया जा सकता है। उन्होंने चंद्रयान मिशन का जिक्र करते हुए छात्रों से बाधाओं को अवसर के रूप में देखने का आग्रह किया। कहा कि सीखना एक जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने ग्रेजुएट्स को समाज के लिए उपयोगी इनोवेशन करने का आग्रह किया।
छात्रों से अपनी जड़ों से जुड़े रहने, भविष्य का निडर होकर सामना करने और प्रोफेशनल नेटवर्क से परे लंबे समय तक बने रहने वाले रिश्ते बनाने की बात कही।
ग्रेजुएट्स को समर्पित त्रिशून्य का अनावरण
आईआईटी ग्रेजुएट्स को समर्पित एक प्रतिमा त्रिशून्य का भी अनावरण समारोह के दौरान किया गया। इस प्रतिमा के जरिए मानव जीवन के तीन पहलुओं- जिज्ञासा, लचीलापन और दूरदर्शिता को दिखाया गया है। इसमें जिज्ञासा का अर्थ नए रास्तों की खोज से है, जो रिसर्च को जन्म देती है। लचीलेपन का अर्थ चुनौतियों को स्वीकार करने और असफलताओं को विकास में बदलने की शक्ति से है। वहीं, दूरदर्शिता व्यक्ति को सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस देती है। मूल रूप से प्रतिमा के जरिए सीखने, विकास और सृजन के अनंत चक्र को दर्शाया गया है।
इन होनहारों को मिले सिल्वर मेडल
एमटेक:
-अमन कुमार सिंह (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग)
-दम्मू अक्षय (सस्टेनेबल एनर्जी)
-जूही दुबे (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग)
-रक्षित वीएस (सस्टेनेबल एनर्जी)
-श्वेता गिरिजेश त्रिपाठी (कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग)
-विकास कुमार तोमर (थर्मल एंड एनर्जी सिस्टम इंजीनियरिंग)
-
एमएससी:
मोनिका (केमिस्ट्री)
अमर जांगिड़ (फिजिक्स)
-
बीटेक:
-अदिति अग्रवाल (सिविल इंजीनियरिंग)
-गायत्री सचदेवा (केमिकल इंजीनियरिंग)
-प्रिया शर्मा (मैकेनिकल इंजीनियरिंग)
-सदानंद शर्मा (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग)
-संस्कार पुरवार (मैटीरियल इंजीनियरिंग)