- 2016 में ट्रांजिट कैंपस से शुरू हुई पढ़ाई, 2023 में जगती में बना अपना कैंपस संस्थान
- अब एमबीए के साथ पीएचडी, स्वास्थ्य प्रबंधन और बीटेक-एमबीए जैसे नए कोर्स शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। दस साल पहले आईआईएम जम्मू में पढ़ाई शुरू हुई तो पहले बैच में सिर्फ 47 छात्र थे। तब यह जम्मू के कैनाल रोड पर ट्रांजिट कैंपस से चल रहा था। आज 200 एकड़ का कैंपस है और 1,400 से ज्यादा छात्र हैं । इन दस वर्षों में कई नए कोर्स शुरू हुए, संस्थान श्रीनगर तक पहुंचा और जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर भी काम हुआ।
शुरुआत में आईआईएम में सिर्फ एमबीए की पढाई होती थी। बाद में प्रबंधन में पीएचडी, पांच साल का एकीकृत प्रबंधन कोर्स और नौकरी करने वालों के लिए दो साल का एमबीए शुरू हुआ। आईआईटी जम्मू के साथ बीटेक-एमबीए की दोहरी डिग्री शुरू की गई।
एम्स जम्मू और आईआईटी जम्मू के साथ अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य प्रबंधन में दो साल का एमबीए भी शुरू हुआ। जनवरी 2020 में श्रीनगर में भी आईआईएम जम्मू का ट्रांजिट कैंपस शुरू हुआ। इसके बाद वहां अपने परिसर के लिए 11.87 एकड़ जमीन भी मिली।
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चार साल में शोध पत्र आठ से बढ़कर 79 हुए
2019-20 में आईआईएम जम्मू के आठ शोध पत्र प्रकाशित हुए थे। 2020-21 में 13, 2021-22 में 22 और 2022-23 में 41 शोध पत्र प्रकाशित हुए। 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 79 हो गई। इसके बाद 2024-25 में 56 और 2025-26 में 54 शोध पत्र प्रकाशित हुए। इन शोधों में जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई विषय भी रहे। पर्यटन, रोजगार, घोड़ा कारोबार, शहरों में आने-जाने की व्यवस्था, पंचायत, वुलर झील से रोजगार के मौके, कारीगरों की कमाई और अनुच्छेद 370 के बाद जम्मू-कश्मीर में हुए सामाजिक और आर्थिक बदलाव पर काम किया गया।
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दसवें साल में मिलीं दो विदेशी संस्थाओं से मान्यताएं
2025 में आईआईएम जम्मू को दो विदेशी संस्थाओं से पढ़ाई की गुणवत्ता से जुड़ी मान्यताएं मिलीं। एक पांच साल और दूसरी तीन साल के लिए है। संस्थान के दस्तावेज के अनुसार, दोनों मान्यताएं पाने वाला आईआईएम जम्मू देश का पांचवां आईआईएम है। राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग 2025 में इसे देश के प्रबंधन संस्थानों में 35वां स्थान मिला।
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