इस बीच, फारूक अब्दुल्ला के बेटे उमर अब्दुल्ला ने इसे प्रतिशोध की राजनीति बताया है। उमर ने ट्वीट किया, नेशनल कांफ्रेंस ईडी के समन का जवाब देगी। यह कुछ और नहीं बल्कि गुपकर घोषणा के तहत पीपुल्स अलायंस के गठन के बाद की जा रही बदले की राजनीति है। वहीं, पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने कहा, फारूक साहब को अचानक समन भेजना दिखाता है कि भारत सरकार जम्मू-कश्मीर की प्रमुख पार्टियों के एकजुट होने से घबरा गई है।
ईडी का सम्मान सरकार की घबराहट: महबूबा
हाल ही में 14 माह की नजरबंदी से मुक्त हुईं पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने इस घटनाक्रम पर ट्विटर पर लिखा कि फारूक साहब को अचानक सम्मन दिया जाना इस बात का संकेत है कि जम्मू-कश्मीर की मुख्य पार्टियों के एक मंच पर आने से विरोधी पार्टियों में जबरदस्त घबराहट है। हम एक होकर संघर्ष करेंगे। इस तरह के राजनीति प्रतिशोध हमारे अधिकारों के लिए लड़ने के हमारे सामूहिक संकल्प को कुंद नहीं कर सकते।
बदले की कार्रवाई: सज्जाद लोन
पीपुल्स कांफ्रेंस के नेता सज्जाद लोन ने भी ईडी की इस कार्रवाई को प्रतिशोध बताया है। कहा,अफसोस की बात है कि डॉक्टर फारूक को ईडी ने इस तरह अपने दफ्तर तलब किया। इस प्रकार की कार्रवाई से जो भी राजनीतिक दल कुछ हासिल करना चाहते हैं उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।