चुनाव आयोग जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने संबंधी फैसला अक्तूबर महीने में ले सकता है। माना जा रहा है कि 15 अक्तूबर से पहले मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ, जम्मू-कश्मीर) आयोग को रिपोर्ट सौंप सकते हैं। इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर चुनाव आयोग स्थिति का आकलन करने के बाद रियासत में विधानसभा चुनाव कराने अथवा कुछ समय के लिए स्थगित कराने का फैसला करेगा।
हालात का जायजा लेने मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों की पूरी टीम हालात का जायजा लेने जल्द ही रियासत का दौरा कर सकते हैं। इसके साथ ही चुनाव संबंधी फैसला लेने से पहले आयोग की ओर से केंद्रीय गृह मंत्रालय से भी इनपुट लिये जाएंगे। आयोग के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक आयोग की प्राथमिकता जम्मू कश्मीर के वर्तमान हालात, मतदान केंद्रों की स्थिति और सड़क संपर्क के हालात जानने की होगी।
इसके बाद ही अगर सब कुछ ठीक रहा और परिस्थितियां चुनाव कराने के लिए अनुकूल हुईं तो चुनाव की तिथि घोषित करने पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा मतदाता सूचियों के पुनर्निरक्षण के कार्य की भी समीक्षा की जाएगी। आयोग के सूत्रों के मुताबिक मतदाता सूचियों का पुनर्निरक्षण अक्तूबर के पहले सप्ताह तक पूरा हो जाना चाहिए था, पर अब इसमें विलंब होना तय है। जम्मू-कश्मीर में मतदाता सूचियां एक अक्तूबर 2014 तक पूरी की जानी थीं।
जम्मू कश्मीर को विशेष प्रावधान के तहत मतदाता सूचियों के चार काट आफ (एक जनवरी, एक अप्रैल, एक जुलाई और एक अक्तूबर) की सुविधा है। उल्लेखनीय है कि मुख्य चुनाव आयुक्त वीएस संपत ने हाल ही में एक बयान जारी कर कहा था कि हम जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। हालात सुधरने के साथ ही जैसे जैसे व्यवस्था पटरी पर आना शुरू कर देगी, जैसी परिस्थितियां होंगी उसके मुताबिक ही विधानसभा चुनाव संबंधी उचित फैसला लिया जाएगा।