रिक्टर स्केल पर नौ की तीव्रता के साथ भूकंप आया तो भूस्खलन के साथ तीन महीने के अंदर कश्मीर घाटी पूरी तरह से पानी में डूब जाएगी। इससे न सिर्फ कश्मीर घाटी, बल्कि पाकिस्तान को भी नुकसान झेलना पड़ेगा। प्राकृतिक आपदा को रोका नहीं जा सकता है, लेकिन इससे संभला जरूर जा सकता है। ये बातें जम्मू विवि कैंपस के बिग्रेडियर राजेंद्र सिंह सभागार में सोमवार को आयोजित एक दिवसीय सेमिनार के दौरान भूवैज्ञानिक एवं भूकंप विशेषज्ञ प्रो. जीएम भट्ट ने कही।
स्टूडेंट वेलफेयर विभाग की ओर से सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें प्रो. भट्ट ने भारत में ‘भूकंप के खतरे की अवधारणा- मिथक या वास्तविकता’ शीर्षक पर महत्वपूर्ण तथ्यों के साथ विद्यार्थियों सहित शोधकर्ताओं को अवगत करवाया। भूकंप को रोकने के लिए कोई भी पर्याप्त साधन या यंत्र नहीं है, लेकिन इससे होने वाली प्राकृतिक आपदा से संभला जरूर जा सकता है।
प्रो. भट्ट ने अपने प्रेजेंटेशन के दौरान भूकंप और रियासत में भूकंप के इतिहास की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोेलोराडो यूनिवर्सिटी के प्रो. एवं भूवैज्ञानिक रोजर बिलहाम ने दावा किया है कि 9.0 रिक्टर के तहत आने वाला भूकंप कश्मीर संभाग को पूरी तरह से तबाह कर देगा। उन्होंने कहा कि बिलहाम के रिसर्च के मुताबिक भूकंप आने के बाद भूस्खलन की स्थिति पैदा होने से झेलम नदी में पानी के प्रवाह रुकने से घाटी तीन महीने के अंदर पूरी तरह से डूब जाएगी।
इसके साथ ही पाकिस्तान में भी बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाएगी। कश्मीर संभाग की इंडियन प्लेट धीरे-धीरे तिब्बती पठार (प्लाटियू) के अंदर धंसती जा रही हैं, जिसके कारण पीरपंजाल रेंज और जंस्कार रेंज के बीच दबाव पड़ने से बीच में दरार पड़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए सही है कि अपने घर, इमारत के निर्माण के लिए भूकंप विशेषज्ञ और इंजीनियर की सलाह से निर्माण करवाएं।