अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शहर में एक महीने में औसतन 12 हजार वाहनों के चालान हो रहे हैं। करीब 1500 चालान ऐसे हैं जिसमें वाहन किसी का है और जुर्माना भरने के लिए दूसरा व्यक्ति मजबूर है। यानी नियम तोड़ने वाले को छोड़ कर उस पर कार्रवाई की जा रही है जो लंबे समय से शहर में नहीं आया। यह खुलासा निगम के कंट्रोल एंड कमान सेंटर के आंकड़ों से हुआ है। सेंटर में रोजाना ऑनलाइन चालान काटे जा रहे हैं, मगर किसी अन्य व्यक्ति के नाम व पते पर भेजे जा रहे हैं। इस कारण लोग परेशान हैं और आरटीओ दफ्तर के चक्कर काट कर थक चुके हैं। मोबाइल पर चालान की जुर्माना राशि का मैसेज आते ही लोग हैरान हो रहे हैं। समस्या दूर करने के बजाय आरटीओ दफ्तर के कर्मचारी भी लोगों को दर बदर भटका रहे हैं। कहा जा रहा है कि जहां से चालान कटा वहां पर जाएं।
दरअसल, पुलिस मोटर वाहन अधिनियम के तहत इलेक्ट्रॉनिक चालान काटती है। इसमें सीसीटीवी कैमरों के साथ अन्य तरीके भी शामिल हैं। पुलिस की ओर से मोबाइल एप में नंबर लिखने से वाहन मालिक का नाम और पते की जानकारी मिल जाती है। इसके बाद वाहन एप पर दर्ज वाहन स्वामी के नंबर पर भेज दिया जाता है, जिसमें सबसे बड़ी गड़बड़ी की जा रही है। प्रतिमाह करीब डेढ़ हजार लोग वे होते हैं, जिनके वाहन होते ही नहीं। सबसे ताज्जुब की बात यह है कि ऐसी जगहों पर चालान को दिखाया जा रहा है, जहां लोग कई महीने से गए नहीं। ऐसी लापरवाही के कारण लोगों के समय और धन की बर्बादी हो रही है।
दो मामलों से समझें किस हद तक परेशान किया जा रहा
सतवारी कैंट के सेंट्रल बेली इलाके के रहने वाले मनोहर लाल खजूरिया का कहना है कि उनके पास कार है। कई माह से घर से 140 किमी दूर रामबन में नहीं गए, फिर भी दो दिन पहले मोबाइल पर चालान भेज दिया गया। इसे लेकर परेशान हैं। आरटीओ कार्यालय के चक्कर लगाकर थक चुके हैं। कहीं पर कोई भी अधिकारी या कर्मचारी यह बताने को तैयार नहीं है कि चालाक को कैसे ठीक कराया जाए। इससे पहले शहर के मेडिकल कॉलेज के पास चाय की दुकान चलाने वाले को स्कूटी का चालान भेज दिया गया था। दुकानदार भी चालान सही कराने के लिए भटक रहा है, लेकिन उसे जहां चालान हुआ वहां जाने की बात कही जा रही है।
गलत नाम या पते से जो भी चालान आ रहे हैं, उन्हें संबंधित विभाग को भेजकर सही करवाया जा रहा है। अगर किसी को कोई दिक्कत है तो वह कार्यालय आकर जानकारी ले सकता है।
- पवन मंगोत्रा, आरटीओ जम्मू