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जूते-हेलमेट तक नहीं, गीली मिट्टी में उतार दिए गए मजदूर: जम्मू पुल हादसे में खुली विभागीय पोल, 3 मजदूरों की मौत

Sat, 02 May 2026 11:45 AM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

जम्मू के ठठर में पुल निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी और पाइपलाइन लीकेज के कारण मिट्टी कमजोर हो गई जिससे हादसा हुआ। बिना सुरक्षा किट काम कर रहे मजदूर मलबे में दब गए और मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है।
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बनतालाब के ठठर में शुक्रवार को हादसे के बाद दबे लोगों की तलाश में मलबे को हटाते राहत एवं बचाव दल के - फोटो : संवाद
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विस्तार
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जम्मू के ठठर में पुल के पास हादसा कोई प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि सुरक्षा मानकों की ठेंगे पर रखने का नतीजा है। ग्राउंड जीरो पर स्थितियां गवाही दे रही हैं कि निर्माण कार्य के दाैरान कितनी लापरवाही बरती गई। बिना सुरक्षा किट, बिना हेलमेट और बिना जूतों के मजदूरों को गीली मिट्टी में काम पर उतार दिया गया।

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नियमों के मुताबिक किसी भी निर्माण या खुदाई वाली साइट पर मजदूरों के लिए हेलमेट, रिफ्लेक्टर जैकेट और ऊंचे गमबूट (सुरक्षा जूते) अनिवार्य होते हैं। ठठर में मलबे से निकाले गए मजदूर के बदन पर साधारण कपड़े थे। मजदूरों ने जूते भीं नहीं पहने थे। इस कारण भी मिट्टी से बाहर आने में सहायता नहीं मिल पाई। अगर उनके पास उचित जूते और उपकरण होते तो शायद धंसती मिट्टी के बीच उन्हें संभलने या बाहर निकलने में थोड़ी मदद मिल सकती थी।

काम कराने का ठेका पीडब्ल्यूडी ने एक ठेकेदार को दिया था। ठेकेदार ने काम को जल्द निपटाने के चक्कर में सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं दिया। अधिकारियों ने ठेका देने के बाद पल्ला झाड़ लिया। यहां अधिकारी हादसा होने के बाद पहुंचते हैं। साइट पर किसी सेफ्टी ऑफिसर या सुपरवाइजर का न होना बड़ी लापरवाही मानी जा रही है। विभाग के अधिकारियों को नियमित रूप से साइट का दौरा करना होता है।

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पाइपलाइन में लीकेज और विभागीय अनदेखी ने कमजोर की पुल की नींव
ठठर पेट्रोल पंप के पास हुए पुल हादसे में पीएचई विभाग की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां पुल के नीचे से गुजर रही पानी की पाइपलाइन लंबे समय से लीक हो रही थी। इसने मिट्टी को अंदर ही अंदर कमजोर कर दिया। शुक्रवार को यही रिसाव एक बड़े हादसे का कारण बना और काम कर रहे मजदूर मलबे में दब गए।

यह पुल 27 अगस्त 2025 में आई बाढ़ के दौरान ही क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके पुनर्निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग ने 1.84 लाख रुपये का टेंडर जारी किया था। इसका काम तीन दिन पहले ही शुरू हुआ था। विधायक शाम लाल शर्मा ने काम का शुभारंभ कराया था।

विभाग ने काम शुरू करने से पहले पाइपलाइन की लीकेज को ठीक करने की जहमत नहीं उठाई। पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता राजेश अगस्तम ने भी माना है कि पाइपलाइन का रिसाव ही इस ढांचागत विफलता का मुख्य कारण है।

हादसे ने न केवल पाइपलाइन के रिसाव बल्कि निर्माण कार्य के दौरान अपनाए जा रहे सुरक्षा मानकों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जमीन पहले से नरम थी तो सुरक्षा घेरा बनाए बिना खोदाई क्यों की गई? प्रशासन ने अब इस मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि क्या ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों ने खोदाई के दौरान मजदूरों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया और इस लापरवाही का असली जिम्मेदार कौन है।
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मलबे में दबी थीं सांसें... हाैसला जुटाया और मलबा हटाते हुए निकल आए तरसेम
ठठर पुल हादसे में मलबे में दबे तरसेम कुमार ने न सिर्फ मौत को मात दी बल्कि हिम्मत और अटूट आस्था की मिसाल भी पेश की। बाबा जित्तो और बुआ कौड़ी के भक्त झिड़ी निवासी तरसेम कुमार शुक्रवार को उस समय जिंदगी और मौत के बीच फंस गए थे। इसी दाैरान निर्माणाधीन पुल का हिस्सा अचानक भरभराकर गिर पड़ा।

हादसे के करीब 20 मिनट तक तरसेम लगातार मदद के लिए आवाज लगाता रहा लेकिन जेसीबी मशीनों के शोर में उसकी पुकार दबी रही। बाहर से कोई सहारा नहीं मिला तो उसने खुद ही हौसला जुटाया। अपने हाथों से मलबा हटाते हुए उसने नीचे सुरंग बनानी शुरू कर दी। कुछ देर बाद मलबे से बाहर निकले उसके हाथ बचाव दल के लिए उम्मीद की किरण बन गए।

हाथ दिखाई देते ही रेस्क्यू टीम तुरंत हरकत में आई और तरसेम को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। वे करीब तीन घंटे तक मलबे में फंसे रहे। प्राथमिक उपचार के बाद उसे घर भेज दिया गया।
स्थानीय लोग इसे बाबा जित्तो और बुआ कौड़ी की कृपा मान रहे हैं। उनका कहना है कि झिड़ी में बाबा के दरबार के सानिध्य में रहने वाले तरसेम पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। तभी हादसे से सकुशल निकल आए।
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