प्रदेश में कानूनी समझौतों और दस्तावेजों के लिए जरूरी स्टांप पेपर नहीं मिलने से कई काम रुक गए हैं। ई-स्टांप सुविधा शुरू करने की कवायद भी अभी सिरे नहीं चढ़ पाई है। ऐसे में बैंक लोन, जमीनों की खरीद फरोख्त और रजिस्ट्री के काम प्रभावित हो गए हैं।
वर्तमान में कहीं पर भी स्टांप पेपर नहीं मिल पा रहे हैं। सरकार ने ई स्टांप सुविधा शुरू करने की योजना बनाई है, लेकिन इस पर अमल का इंतजार जारी है। एडवोकेट नरेश चौधरी का कहना है कि बहुत से कार्यों के लिए स्टांप पेपर जरूरी हैं। लेकिन इसकी हर जगह किल्लत है। ट्रेजरी दफ्तर भी बंद हैं। जिन लोगों के पास स्टांप पेपर थे, वो पहले से बिक चुके हैं।
ई स्टांप सुविधा मिलने तक स्टांप पेपर उपलब्ध करवाए जाने चाहिए। एडवोकेट सुरेंद्र कुमार का कहना है कि स्टांप पेपर के बिना कई कार्य नहीं हो पा रहे। दस्तावेज तैयार नहीं हो पा रहे हैं। कई जगहों पर 100 रुपये, कई जगह 10, 20, 50 और हजार रुपये के स्टांप अनिवार्य होते हैं। अदालतें बंद हैं।
जिसकी वजह से स्टांप पेपर नहीं मिल रहे। वित्त विभाग के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि कोविड-19 के चलते इसकी किल्लत पेश आई है। वैसे भी सरकार अब ई स्टांप की सुविधा शुरू करने जा रही है। आठ जून के बाद समस्या का समाधान हो जाएगा।
जल्द शुरू होगी ई-स्टांप सुविधा : कोतवाल
राजस्व विभाग के प्रधान सचिव और वित्त आयुक्त पवन कोतवाल का कहना है कि ई स्टांप की सुविधा के लिए प्राइवेट कंपनी से एमओयू साइन हो चुका है। जल्द ही यह सुविधा शुरू हो जाएगी।