बारिश नहीं होने के चलते लोगों कों सूखी सर्दी से जूझना पड़ रहा है। सूखी सर्दी लोगों की सेहत बिगाड़ रही है। लोग खांसी, जुकाम और बुखार से पीडि़त हो रहे हैं। बच्चे इसकी चपेट में ज्यादा हैं। अचानक ठंड की चपेट में आने से कमजोर बच्चों में हाइपोथर्मिया की शिकायत बढ़ी है। रेसप्रेटरी संक्रमित रोगों से बच्चों के साथ हर आयु वर्ग के लोग प्रभावित हैं।
सर्द हवाओं के साथ दिन और रात के तापमान में सामान्य से ज्यादा गिरावट से बच्चों में हाइपोथर्मिया की शिकायत बढ़ी है। तापमान के अचानक उतार-चढ़ाव से शरीर इसके हिसाब से खुद को तेजी से ढाल नहीं पाता है। हाइपोथर्मिया में कमजोर बच्चे बाहर के तापमान को झेल नहीं पाते हैं, इससे भीतर का तापमान गड़बड़ा जाता है।
शरीर के ठंडा होने से कई तरह की दिक्कतें आ जाती हैं। इसकी चपेट में छह माह से कम आयु वर्ग के बच्चे ज्यादा आते हैं। बच्चों में एक्यूट ब्रोंकोलाइटस (सांस संबंधी) भी परेशानी हो जाती है। इसमें सांस की नली में सूजन आ जाने के कारण पीडि़त बच्चा सामान्य रूप में सांस नहीं ले पाता है। पीडि़त की हालत निमोनिया की तरह हो जाती है। बड़े बच्चों में जुकाम, खांसी और बुखार की शिकायत अधिक हो रही है।