नेनो ड्रोन और आल टैरेन न्यू व्हीकल: स्रोत अमर उजाला
- रात को भी छिपे आतंकियों को ढूंढ निकालेगा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। भारतीय सेना ने अपने बेड़े में एक नैनो ड्रोन शामिल किया है। यह देखने में खिलौना लगता है, लेकिन विशेषताएं ऐसी हैं कि दुश्मन के होश फाख्ता कर दे। अखनूर में वेटरंस-डे पर इसे प्रदर्शित किया गया। यह नैनो ड्रोन नार्वे से निर्मित है। इसकी कीमत तीन करोड़ रुपये है। इसकी खासियत है कि यह बिना जीपीएस के काम करता है। मात्र पांच इंच की लंबाई वाला यह ड्रोन कहीं भी घुसकर छिपे आतंकियों का पता लगा लेगा। इसका इस्तेमाल सेना ने हाल ही में अखनूर में आतंकियों के खिलाफ चलाए ऑपरेशन में किया है।
एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि चार ड्रोन नार्वे से मंगवाए हैं। इसमें दो कैमरे हैं। रात में काम करने वाले ड्रोन में थर्मल कैमरा भी है। यह दो किलोमीटर की लंबाई और एक किलोमीटर की ऊंचाई तक फुल बैटरी चार्ज के साथ 25 मिनट तक उड़ सकता है। 100 मीटर की ऊंचाई से कहीं भी छिपे व्यक्ति को ढूंढ सकता है।
हर मौसम में काम करने
वाला वाहन भी मिला
सेना ने आतंकरोधी अभियानों में इस्तेमाल किए जाने वाले ऑपरेशनल वाहनों में एक हाईटेक वाहन शामिल किया है। बर्फ, पानी, पहाड़, कीचड़ कहीं भी यह वाहन जा सकता है और 600 किलो वजन उठा सकता है। इसमें चार जवान सफर कर सकते हैं। खासकर कहीं अगर कोई घायल हो तो उसे उठाकर लाया जा सकता है। यह पूरी तरह से बुलेटप्रूफ है। ऐसा ही एक अन्य वाहन भी सेना ने शामिल किया है, जो हजर हजार किलो वजन उठा सकता है।
नेनो ड्रोन और आल टैरेन न्यू व्हीकल: स्रोत अमर उजाला