कोर्ट ने कहा कि महिलाओं और लड़कियों के लिए टेली / ऑनलाइन कानूनी और परामर्श सेवा और महिलाओं के लिए सुरक्षित स्थान तय किए जाने चाहिए। इसके साथ ही किराने तथा दवा की दुकानों पर शिकायत करने की सुविधा होनी चाहिए। इसके साथ ही खाली पड़े होटल, शिक्षण संस्थानों को आश्रय स्थल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के सदस्य सचिव घरेलू हिंसा से जुड़े लंबित मामलों की सूची तैयार करें और ऐसे मामलों में महिलाओं की सुरक्षा और उनके हितों को सुनिश्चित करें। वे इसके लिए पुलिस की भी सहायता ले सकते हैं। निर्देश दिया कि अगली तारीख पर उठाए जाने वाले कदमों की रिपोर्ट पेश की जाए।