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Dogri Manyta Diwas : डोगरी भाषा को मान्यता के 20 साल बाद भी प्रोत्साहन नीति का इंतजार

Fri, 22 Dec 2023 04:50 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

नटरंग के संस्थापक पद्मश्री बलवंत ठाकुर ने बताया कि डोगरी भाषा को मान्यता तो मिल गई है, लेकिन 20 साल बाद भी राज्य सरकार प्रोत्साहन नीति नहीं बना पाई है। चाहे कलाकार हों, लेखक हों या साहित्यकार सरकार के तरफ से इन्हें कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलती है।
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डोगरी मान्यता दिवस - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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डोगरी भाषा को मान्यता मिलने के 20 साल बाद भी प्रोत्साहन नीति का इंतजार है। इस कारण भाषा अस्तित्व बचाने के लिए आज भी संघर्ष कर रही है। निजी स्कूल तक भाषा को नहीं अपना पाए हैं। 20 साल बाद भी डोगरी भाषा को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। 2003 में डोगरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। इसे लेकर लोगों में काफी उत्साह था।

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लोग इस दिन को धूमधाम से मनाते भी हैं। लेकिन यह सिर्फ एक दिवस बन कर ही रह गया है। नटरंग के संस्थापक पद्मश्री बलवंत ठाकुर ने बताया कि डोगरी भाषा को मान्यता तो मिल गई है, लेकिन 20 साल बाद भी राज्य सरकार प्रोत्साहन नीति नहीं बना पाई है। चाहे कलाकार हों, लेखक हों या साहित्यकार सरकार के तरफ से इन्हें कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलती है। डोगरी संस्थाएं अपने स्तर पर कार्यक्रम का आयोजन करती हैं। अन्य राज्यों में वहां की सरकारों ने मातृभाषा को बढ़ावा देने के लिए नीतियां बनाई हैं। सरकार को चाहिए की डोगरी को बढ़ावा देने के लिए नीति बनाए। कलाकारों, लेखकों को आर्थिक सहायता प्रदान करे, ताकि भाषा का प्रचार-प्रसार हो सके।

उच्च शिक्षण संस्थान डोगरी को दें बढ़ावा

साहित्यकार व पद्मश्री से सम्मानित मोहन सिंह ने कहा कि डोगरी को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने के बाद से काफी किताबें छपी हैं। कई उच्च शिक्षण संस्थाओं में डोगरी को शामिल किया गया है, जबिक अभी कई ऐसे उच्च शिक्षण संस्थान हैं, जहां अभी भी डोगरी को शामिल नहीं किया गया है। नई शिक्षा नीति में प्राथमिक कक्षा तक बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा देनी है, लेकिन स्कूलों के तरफ से उदासीनता देखने को मिलती है। उच्च शिक्षण संस्थाओं व प्राथमिक कक्षाओं में डोगरी को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि इससे रोजगार सृजन हो। इसके अलावा भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए पत्राचार और कार्यालयों में कागजी कार्रवाई भी डोगरी में हो।
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किताबें तो बहुत लिखीं, जमीनी स्तर पर नहीं हुआ काम

डोगरी संस्था के प्रधान ललित मंगोत्रा ने कहा कि डोगरी भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करवाने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा था। 2003 के बाद से डोगरी में सबसे ज्यादा किताबें लिखी गईं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ है। नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक कक्षा तक बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा देनी है। सराकर को इसे प्राथमिक कक्षाओं में गंभीरता से लागू करना चाहिए। चतुर्थ कर्मचारियों के लिए कम से कम डोगरी में परीक्षा होनी चाहिए। जेकेएएस में भी एक पेपर डोगरी का हो, ताकि अधिकार भाषा को समझ सकें। अभिभावक भी बच्चों को डोगरी में बात करने के लिए प्रेरित करें।

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