जीएमसी के डाक्टर सुशील पंडिता को निलंबित किए जाने के विरोध में सोमवार को जूनियर डाक्टरों ने कामकाज ठप कर दिया। कुछ घंटों तक जनरल वार्ड और आपरेशन थिएटर में डाक्टर नहीं पहुंचे। सिर्फ ओपीडी में मरीजों को देखा गया। हालांकि इस दौरान इमरजेंसी में डाक्टरोें ने काम किया। रेजीडेंट डाक्टर एसोसिएशन ने मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन और पैरा मेडिकल स्टाफ के साथ मिलकर डाक्टर के निलंबन का विरोध किया।
साथ ही जीएमसी के प्रिंसिपल का घेराव किया। जीएमसी के अलावा अन्य अस्पतालों में भी रजिस्ट्रार और पीजी डाक्टरों ने कामकाज ठप रखा। डाक्टरों के दबाव के बाद जीएमसी प्रबंधन ने निलंबन आदेश वापस ले लिया। इसकी पुष्टि प्रिंसिपल डा. घनश्याम देव ने की है। डाक्टरों ने चेतावनी दी है कि भविष्य में किसी तरह की कार्रवाई करने के पहले प्रशासन संबंधित स्टाफ को कारण बताओ नोटिस दिया जाए और उसके जवाब के बाद ही फैसला लिया जाए।
डाक्टर तानाशाही रवैया स्वीकार नहीं करेंगे। सुबह से ही जीएमसी में माहौल तनावपूर्ण रहा। डाक्टरों ने प्रिंसिपल डा. घनश्याम देव गुप्ता को उनके चैंबर में ही घेर लिया। इस दौरान डा. गुप्ता प्रदर्शनकारी डाक्टरों को संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। डाक्टरों ने चैंबर के अंदर ही नारेबाजी शुरू कर दी। निलंबन के बाद से नजर नहीं आ रहे डाक्टर के लापता होने की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करवाने की मांग की गई।
उनका कहना था कि सीनियर रजिस्ट्रार को बिना जांच रिपोर्ट के कैसे निलंबित किया जा सकता है। उधर, डाक्टरों ने घटना के विरोध में मंगलवार को सुबह आठ बजे मीटिंग भी बुलाई है। मेडिकल टीचर एसोसिएशन के प्रधान डा. सुनील कोतवाल ने घटना की निंदा करते हुए निलंबन को गलत बताया। उन्होंने कहा कि डाक्टरों को उनका समर्थन जारी रहेगा।