ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में मेडिकल बोर्ड सदस्यों की लापरवाही से एक दिव्यांग छात्र की मौत हो गई। घोर लापरवाही पर स्वास्थ्य निदेशालय ने मेडिकल बोर्ड के सदस्य तीनों डॉक्टरों और एक नर्सिंग अर्दली को निलंबित कर दिया है। यह छात्र दसवीं बोर्ड परीक्षा में दिव्यांगता प्रमाणपत्र लेने पहुंचा था। बताया जा रहा है कि एक्यूट मस्कुलर डिस्ट्रोफी से ग्रस्त छात्र की मां और बहन डॉक्टरों से गुहार लगाती रहीं। हालत बिगड़ने पर छात्र को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। निदेशालय ने यह कार्रवाई घटना के वायरल वीडियो पर संज्ञान में की है।
एक अधिकारी ने बताया कि दिव्यांग छात्र को जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड ने दसवीं कक्षा के लिए उत्तर पुस्तिका पर लिखने वाला साथ लाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। यह छात्र जिस रोग से ग्रस्त था, उसमें मांसपेशियां इतनी कमजोर होती हैं कि ग्रसित खुद से ज्यादा कुछ नहीं कर सकता। यहां तक कि खाना निगलने तक में परेशानी होती है। छात्र अपनी मां और बहन के साथ वाहन में श्रीनगर जिला चिकित्सा बोर्ड कार्यालय पहुंचा।
मां और बहन कार्यालय में पहुंचीं और बोर्ड सदस्य डॉक्टरों से छात्र की जांच वाहन में ही करने की गुहार लगाई। डॉक्टरों को बताया गया कि छात्र कार्यालय आने की स्थिति में नहीं है और उसकी हालत भी नाजुक है। अधिकारी ने बताया कि छात्र की तबीयत बिगड़ने की जानकारी होने पर भी डॉक्टर छात्र की जांच को नहीं आए। इसी दौरान छात्र को सांस लेने में अचानक ज्यादा तकलीफ होने लगी। मां और बहन ही उसे फौरन निकटवर्ती अस्पताल ले गईं, लेकिन छात्र ने दम तोड़ दिया।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मेडिकल बोर्ड में शामिल गांदरबल उप जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. नीलोफर, मेडिकल अफसर लीपर अस्पताल शुजा रशीद और श्रीनगर के राजकीय गौसिया अस्पताल के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. फरहान बशीर के अलावा नर्सिंग अर्दली गुलाम हसन को निलंबित कर दिया गया है।