जम्मू जिला पुलिस के एसएसपी, एसपी, डीएसपी जैसे सभी सीनियर अधिकारियों की टीम। 10 दिन का वक्त और प्रदेश के डीजीपी स्तर के हत्यारोपी से लगातार पूछताछ के बाद भी जिला पुलिस डीजीपी हेमंत लोहिया की मौत मामले की गुत्थी सुलझाने में सफल नहीं हो पाई है। इस मामले में पुलिस किसी तरह के टेरर एंगल से मना कर चुकी है।
इसके बावजूद 10 दिन बाद भी पुलिस ने एक सवाल का जवाब नहीं दिया कि आखिर लोहिया की हत्या क्यों की गई? 10 दिन के भीतर भी पुलिस को इस हत्या के वास्तविक कारण पता नहीं चले, तो अब मामले की जांच क्राइम ब्रांच को दे दी गई। इसमें आईपीएस अधिकारी समेत एसएसपी, एसपी, डीएसपी और इंस्पेक्टरों वाली 8 सदस्यीय कमेटी गठित कर दी।
पुलिस की ओर से वारदात के दूसरे दिन ही यह बता दिया था कि इस हत्या मामले में कोई टेरर एंगल नहीं है। बता दें कि हत्या करने वाला वारदात के 12 घंटे के बाद ही गिरफ्तार कर लिया गया था। वारदात से लेकर गिरफ्तारी तक पुलिस की ओर से लगातार इसे लेकर जानकारी साझा की जा रही थी। लेकिन गिरफ्तारी के बाद पुलिस अधिकारियों ने इस मामले पर चुप्पी साध ली और अब तक चुप्पी टूट नहीं रही। वारदात के बाद दोमाना पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था। एसएसपी, एसपी, डीएसपी की अगुवाई वाली टीमें लगातार यासिर से पूछताछ करती रहीं। लेकिन अचानक से यह मामला क्राइम ब्रांच को दे दिया गया।
4 साल बाद क्राइम ब्रांच के पास हाई प्रोफाइल केस
बता दें कि वर्ष 2018 में क्राइम ब्रांच जम्मू को एक हाई प्रोफाइल मामले की जांच दी गई थी। यह मामला था कठुआ का रसाना कांड। इसमें एक आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद उसकी निर्मम हत्या कर दी थी। तब इस मामले की जांच तत्कालीन एसएसपी रमेश जाला के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच को सौंपी गई। अब 4 साल के बाद क्राइम ब्रांच के पास हाई प्रोफाइल मामले की जांच ट्रांसफर हुई है।
आखिर क्यों की गई हत्या
सूत्रों की मानें तो हेमंत लोहिया की हत्या उनके हेल्पर यासिर लोहार ने इसलिए की थी, क्योंकि वह नौकरी न मिलने से आहत था। इससे परेशान होकर और गुस्से में आकर उसने डीजीपी की हत्या कर दी। ऐसा आरोपी ने पुलिस की जांच में बताया है। लेकिन इसकी अधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं कर रहा।
मामले की जांच तेजी होनी चाहिए
अब क्राइम ब्रंच को 10 दिन बाद जांच क्यों दी गई है, इसका जवाब तो मौजूदा डीजीपी या एडीजीपी दे सकते हैं। इतना जरूर है कि इस मामले की जांच में तेजी लाई जानी चाहिए। 10 दिन काफी होते हैं। रही बात क्राइम ब्रांच को मामला ट्रांसफर करने की तो अच्छी बात है कि इसके लिए एसआईटी बनाई गई है। आईपीएस अफसर समेत अन्य अफसर शामिल किए गए हैं। - एसपी वैद, पूर्व डीजीपी, जम्मू-कश्मीर।
डीजीपी, एडीजीपी ने नहीं दिया कोई जवाब
इस मामले में डीजीपी दिलबाग सिंह और जम्मू के एडीजीपी मुकेश सिंह से बात करने की कोशिश की गई। उक्त अधिकारियों को फोन किया गया। व्हाटसएप पर मैसेज भी किया, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया। बहरहाल, जब भी उक्त अधिकारी उक्त सवालों के जवाब देंगे, तो हम उन्हें प्रमुखता से प्रकाशित करेंगे।
कब मिलेंगे इन सवालों के जवाब
- सवाल 1. यासिर लोहार ने हेमंत लोहिया की हत्या क्यों की।
- सवाल 2. 10 दिन बाद मामले की जांच क्राइम ब्रांच को क्यों दी गई
- सवाल 3. क्या इस मामले में कोई एसआईटी बनाई गई है
- सवाल. 4 क्या 10 दिन बाद भी जिला पुलिस वास्तविक कारण पता लगाने में असफल रही, इसलिए जांच क्राइम ब्रांच को दी