- 4.5 करोड़ से बनेगा सांस्कृतिक एवं विरासत केंद्र, शोध, कला और आध्यात्मिक गतिविधियों को मिलेगा मंच
- आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ युवाओं को रचनात्मकता और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने पर जोर
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने की दिशा में शनिवार को महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने थलवाल स्थित माता भद्रकाली स्थान पर माता लल्लेश्वरी सांस्कृतिक एवं विरासत केंद्र की आधारशिला रखी। कैपेक्स बजट के तहत 4.5 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह केंद्र योगिनी लल्लेश्वरी की शिक्षाओं, दर्शन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण व प्रसार का माध्यम बनेगा।
एलजी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर प्राचीन काल से ऋषियों, संतों और सत्य के साधकों की भूमि रहा है। माता लल्लेश्वरी की शिक्षाएं सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर सहिष्णुता, समानता और आत्मिक परिवर्तन का संदेश देती हैं। प्रस्तावित केंद्र उनकी विचारधारा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ शोध और सांस्कृतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। केंद्र में प्रदर्शनियां, अनुवाद कार्य और अभिलेखीय सुविधाएं विकसित की जाएंगी। कश्मीर शैव दर्शन से जुड़ी फेलोशिप को भी बढ़ावा दिया जाएगा। यह केंद्र केवल एक भवन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण की संस्थागत नींव होगा। युवाओं को कला और रचनात्मक अभिव्यक्ति से जोड़कर सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आज की तेज रफ्तार जिंदगी में मानसिक तनाव और पहचान से जुड़े संकट बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में संतों की शिक्षाएं आत्म-अनुशासन, मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन का आधार बन सकती हैं। कार्यक्रम में संस्कृति विभाग के प्रधान सचिव बृज मोहन शर्मा, मंडलायुक्त जम्मू रमेश कुमार, आईजीपी जम्मू तेजिंदर सिंह, डीआईजी श्रीधर पाटिल, डीसी डॉ. राकेश मिन्हास, अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय निदेशक केके सिधा, राहत एवं पुनर्वास आयुक्त अरविंद करवानी, माता भद्रकाली स्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष दिलीप पंडिता, महासचिव अशोक काव आदि लोग मौजूद रहे।
थलवाल में माता लल्लेश्वरी सांस्कृतिक एवं विरासत केंद्र की एलजी मनोज सिन्हा ने आधारशिला रखी। इस