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Jammu News: उत्तर भारत के पहले बायोटेक पार्क में जल्द शुरू होंगे अनुसंधान

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कठुआ के घाटी औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित बायोटेक पार्क। संवाद
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कठुआ। उत्तर भारत के पहले बायोटेक पार्क में अगले कुछ महीनों में अनुसंधान से लेकर स्टार्टअप को बढ़ावा देने का काम शुरू होने जा रहा है। फरवरी के अंत तक सभी उपकरण यहां स्थापित कर दिए जाएंगे।
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इस परियोजना को पीपीपी मोड पर चलाने को लेकर भी प्रक्रिया जारी है। कृषि-उद्यमियों, स्टार्टअप, प्रगतिशील किसानों, वैज्ञानिकों व छात्रों के लिए यह रोजगार व विचार के नए द्वार खोलने का काम करेगा। दरअसल, कठुआ के घाटी औद्योगिक क्षेत्र में 46 करोड़ की राशि से 10.50 एकड़ में बायोटेक पार्क का निर्माण किया गया है। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मई 2022 में इमारत का उद्घाटन किया था। काम पूरा होने के बाद इसके संचालन के लिए वैज्ञानिकों की जरूरत थी। इससे भी ज्यादा जरूरी था यहां मशीनों, उपकरणों की स्थापना करना। तीसरी और महत्वपूर्ण किस्त के रूप में 6.4 करोड़ की राशि जारी होने के साथ ही बायोटेक पार्क में उपकरण स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह परियोजना भारत सरकार के बायोटेक्नॉलजी विभाग की फंडिंग से पूरी की गई है।

जम्मू-कश्मीर में लगभग 3500 औषधीय गुण वाले पेड़-पौधे पाए जाते हैं। ऐसे में प्रदेश के किसी भी कोने से किसान, युवा यहां अनुसंधान करवाकर अपने उत्पाद को बेहतर बना सकेंगे। खास तौर से भद्रवाह में लैवेंडर की बड़े पैमाने पर खेती के बाद यह परियोजना इस व्यवसाय के लिए भी नए आयाम खोलेगी। इस बायोटेक पार्क से जहां जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की जैव विविधताओं, औषधीय व ऐरामैटिक (सुगंधित) पौधों पर अनुसंधान होगा, वहीं यह ग्रीन कैटेगरी के उद्योगों को भी बढ़ावा देगा। पार्क जम्मू संभाग के कंडी इलाकों से लेकर भद्रवाह, बनी, बसोहली और किश्तवाड़ आदि के मौसम के अनुकूल औषधीय पौधों की पैदावार बढ़ाकर किसानों को पारंपरिक खेती से अलग बेहतर आय के साधन भी उपलब्ध कराएगा।
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शिक्षित बेरोजगार युवाओं के ज्ञान और उनकी उद्यमी सोच को बढ़ावा देने के लिए सीएसआईआर आईआईआईएम, जम्मू की ओर से फिलहाल इसकी देखरेख की जा रही है। उत्तर भारत का यह बायोटेक पार्क जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के अलावा हिमाचल, पंजाब सहित अन्य राज्यों के लिए भी सहायक सिद्ध होगा खासकर तब जबकि देशभर से उद्योग को कठुआ जिले में आकर्षित किया है।

ये होंगी सुविधाएं



एक्सट्रेक्शन -जिसमें पायलट स्केल पौधों से एक्सट्रेक्शन की जाएगी

कंपाउंड फर्मेंटेशन-एंजाइम या अन्य मॉलिक्यूल पर काम होगा

सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन-जिसमें वैज्ञानिक और केमिकल स्टैंडर्डाइजेशन

किया जाएगा

एनालिटिकल लैब सुविधा

ट्रेनिंग और कांफ्रेंस हॉल

बिजनेस विकास ग्रुप के लिए मीटिंग रूम

कैफेटेरिया, बैंक और डिस्पेंसरी


बायोटेक पार्क कृषि, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्र में अत्याधुनिक तरीके से सहायक होने जा रहा है। फरवरी में विश्लेषणात्मक, परीक्षण, प्रयोगात्मक लैब पूरी तरह से तैयार हो जाएगी। इससे न सिर्फ स्टार्टअप को फायदा मिलेगा बल्कि स्कालर, इनटर्न और विद्यार्थियों को भी एक्सपोजर मिलेगा।
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-डॉ. जबीर अहमद

निदेशक, सीएसआईआर आईआईआईएम, जम्मू
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