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Jammu News: कठुआ के सरथल में नौ करोड़ से बनेगा आलू बीज फार्म

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कठुआ। नए साल में कठुआ कृषि पर्यटन में नया अध्याय लिखेगा। बनी-भद्रवाह रोड से सटे सरथल में कृषि विभाग 110 कनाल में आलू बीज फार्म तैयार कर रहा है। सर्दियों में बर्फ से लकदक रहने वाले इस क्षेत्र में मार्च से कुफरी बादशाह किस्म की बिजाई कर पहला बीज तैयार किया जाएगा। इस फार्म पर नौ करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसके लिए कवायद शुरू हो गई है।
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देश के विभिन्न हिस्सों में जिस तरह से पर्यटक वहां घूमने के साथ वहां उगाई जाने वाली फसलों को लाइव देख सकते थे। अब ऐसा ही कुछ कठुआ जिले के पर्यटन स्थल सरथल में होने जा रहा है। यहां आने वाले पर्यटक अगले सीजन मेंआलू की फसल देखने के साथ सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। विभाग आलू फार्म को पर्यटन के लिहाज से भी विकसित कर रहा है। इसमें प्रबंधक के कार्यालय, चौकीदार के कमरे और फार्म हाउस के अलावा जमीन के बीचोंबीच बहते नाले पर एक पुल, ओपन कैफे हाउस और एक एकड़ पर आलू की लाइव डिमांस्ट्रेशन की सुविधा रहेगी। वाहन पार्किंग की सुविधा अलग से होगी।



खास यह है कि सरथल में पहली बार आलू फार्म में कुफरी बादशाह किस्म के आलू का बीज तैयार किया जाएगा। विभाग का दावा है कि इसके बीज खास तौर से कुफरी (शिमला) से लाए जाएंगे। इससे उम्दा गुणवत्ता के बीज तैयार कर जिले में किसानों की मांग को पूरा किया जाएगा। ऐसे में कठुआ के साथ-साथ आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर के कई जिलों की अन्य राज्यों से आलू के बीज मंगवाने की निर्भरता भी कम हो जाएगी।
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प्रदेश में सबसे बड़ा
आलू फार्म नत्थाटॉप में
जम्मू-कश्मीर में खराब मौसम और नीमाटोड बीमारी से आलू बीज तैयार करने में चुनौतियां पेश आ रही हैं। सरथल फार्म बड़ी राहत मिल सकती है। प्रदेश में सबसे बड़ा आलू बीज फार्म नत्थाटॉप के पास है। रामबन में भी दो छोटे फार्म हैं। यहां कुफरी ज्योति, के गिरीराज, के हिमालिनी, के चंद्रमुखी और पीपी48 किस्म का बीज तैयार किया जाता है।
70 के दशक में नत्थाटॉप में बनाए गए फार्म से तैयार होने वाले आलू बीज की पूरे प्रदेश में आपूर्ति होती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से नीमाटोड बीमारी से उत्पादन लगातार गिरता जा रहा है। आलू का अच्छी किस्म और रोग मुक्त बीज उच्च पर्वतीय क्षेत्र में ही तैयार किया जाता है। बनी तहसील के सरथल इलाके की समुद्रतल से ऊंचाई 2500 मीटर है। इस क्षेत्र में किसी तरह की बीमारी भी नहीं है। ऐसे वातावरण में आलू की अच्छी किस्म का सर्वश्रेष्ठ बीज तैयार करना आसान होगा।
एक तरफ सरकारी फार्म पर बीज तैयार होगा, वहीं आसपास के किसानों को भी इससे बड़े स्तर पर लाभ मिलेगा। नत्थाटॉप में आलू फार्म जिस जगह पर है, वहां पर धुंध रहती है। तेज हवा का भी असर रहता है। इसे विंडवर्ड साइड कहा जाता है। फसल पर फूल खिलने के दौरान मौसम की ऐसी परिस्थितियां अनुकूल नहीं होतीं। हिमाचल में कुफरी की साइट लीवर्ड साइड पर है, जहां धूप खिली रहती है और तेज हवाओं के साथ धुंध का असर नहीं रहता। बीज की खेती के लिए यह सबसे अनुकूल होता है। सरथल की भौगोलिक परिस्थितियां भी लीवर्ड साइड हैं।
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नत्थाटॉप फार्म में नीमाटोड
ने तोड़ी आलू फार्म की कमर





नत्थाटॉप में आलू फार्म का कुल भूमि क्षेत्र 560 कनाल है। नीमाटोड बीमारी की वजह से इसके 25 से 35 फीसदी क्षेत्र का ही मुश्किल से इस्तेमाल हो पा रहा है। इससे उत्पादन के आंकड़े भी लगातार गिर रहे हैं। फार्म सूत्रों के अनुसार, 2022 में 368 क्विंटल, 2023 में 155.65 क्विंटल और इस साल मात्र 143.78 क्विंटल ही आलू बीज का उत्पादन हो पाया है। ऐसे में प्रदेश में बीज तैयार करना कृषि विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है।


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सरथल में 110 कनाल पर आलू फार्म को तैयार किया जा रहा है। यह फार्म न सिर्फ सरथल बल्कि बनी, लोहाई मल्हार के इलाकों में भी किसानों को उच्च गुणवत्ता और उपयुक्त मौसम के बीज मुहैया करवाएगा। यह एग्रो टूरिज्म की मिसाल बनेगा। पांच साल तक ताजा जमीन उपलब्ध होने से यहां आलू को किसी भी तरह की बीमारी का भी खतरा नहीं है।
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- संजीव राय, मुख्य कृषि अधिकारी, कठुआ

25सीटीके06..महाकुंभ के लिए सामना को खाना करते संत व भाजपा कार्यकर्ता। संवाद- फोटो : jammu

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