अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। मानसून सीजन में संक्रामक रोगों के साथ अब डेंगू हमलावर हो गया है। स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के हेल्थ विंग के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। साफ पानी जमा होने से रोकने के लिए विशेष कदम नहीं उठाए जा रहे। इस कारण वीरवार को 13 केस मिले, जिनमें 10 मामले शहर के हैं। दो दिन के सैंपलों की रिपोर्ट सामने आने से संबंधित विभागों के अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है।
शहर से ही औसतन 3 से 4 मामले मिल रहे हैं। अब तक डेंगू के 75 केस आ चुके हैं, जिसमें जम्मू से ही 53 मामले हैं। यानी 75 से 80 प्रतिशत डेंगू शहर में पनप रहा है। नए मामलों में उधमपुर, कठुआ और रियासी भी शामिल है। अधिकांश हिस्सों में लारवा मिल रहा है, जिसे मौके पर मलेरिया विंग की ओर से नष्ट करने का दावा किया जा रहा है। आसपास के इलाकों में कुछ दिन से निरंतर शाम और रात को बारिश हो रही है, जिससे कई जगह पानी जमा होने से लारवा पैदा हो रहा है। रिहाड़ी, सरवाल, तालाब तिल्लो, जानीपुर, पुराना शहर, गांधी नगर, त्रिकुटा नगर, सैनिक कॉलोनी, बठिंडी आदि हिस्सों से नए केस मिल रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अगस्त और सितंबर में डेंगू के पीक पर जाने की संभावना है।
न फॉगिंग हुई, न ही जागरूकता अभियान चलाया
स्वास्थ्य विभाग का मलेरिया विंग व निगम भले ही मच्छरों से निपटने के लिए दावे कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात विपरित हैं। लोगों का कहना है- डेंगू से बचाव को लेकर न जागरूकता अभियान चलाया, न ही फॉगिंग करवाई। वार्ड-8 ओल्ड रिहाड़ी के सोनू ने बताया कि पिछले साल भी क्षेत्र में डेंगू के मामले मिले थे। इस साल भी मच्छर तंग कर रहा है। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है। टूटी गलियां और नालियां डेंगू का कारण बन सकती हैं। कई ऐसे स्थल भी हैं, जहां पानी एकत्रित रहता है। राकेश कुमार गुप्ता ने कहा कि विभाग के साथ लोगों को बचाव उपाय करने चाहिए। दुकानदार प्रदीप ने बताया कि पिछले साल भी बच्चों से लेकर बड़े तक डेंगू की चपेट में आए थे और अब फिर बरसात में डर सता रहा है। इलाके में मच्छरों की भरमार है। दीप कुमार ने कहा कि खस्ताहाल नालियों में कई जगह पानी इकट्ठा रहता है। प्रशासन को निकासी की उचित व्यवस्था करनी चाहिए।