जम्मू। इस साल डेंगू के रिकार्ड मामलों और मौतों ने समय पर मच्छरों से निपटने के लिए किए गए प्रबंधों पर सवाल खड़े किए हैं। नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने बरसात से पहले सारी तैयारी पूरी करने के दावे किए थे, लेकिन बरसात के बाद एक साथ डेंगू के सैकड़ों मामले सामने आए। स्वास्थ्य विभाग का दावा रहा कि इस साल पिछले साल की तुलना में डेंगू परीक्षण अधिक किए गए, लेकिन सोचना यह भी होगा कि डेंगू से पीड़ित होने पर ही मरीज सामने आए हैं। उधर, विशेषज्ञों का कहना है कि नवंबर के मध्य या आगे तापमान गिरने पर डेंगू के मामलों में तेजी से गिरावट आएगी।
इस साल शहर के रिहाड़ी, सरवाल, जानीपुर, पलोड़ा इलाके हाट स्पाट बने रहे। जिले में निकले कुल डेंगू के मामलों में 80 से 85 प्रतिशत उक्त इलाकों से ही मिले हैं। इन इलाकों में फॉगिंग के दावों के बावजूद अब भी डेंगू के मामले मिल रहे हैं। जीएमसी सहित एसोसिएटेड अस्पतालों में भी दैनिक आधार पर दर्जनों डेंगू के मामले पहुंच रहे हैं। बच्चों में डेंगू की शिकायत बढ़ने पर प्रमुख जच्चा बच्चा अस्पताल एसएमजीएस में पचास बिस्तर वाला अलग से डेंगू वार्ड तैयार करना पड़ा है। अब तक डेंगू प्रदेश में दस लोगों की जान ले चुका है, जिनमें अधिकांश मौतें जम्मू जिले से हुई हैं।
अब तक 5294 लोग पीड़ित, 10 की हो चुकी है मौत
जम्मू के अलावा कठुआ, उधमपुर, राजोरी, पुंछ, रियासी, किश्तवाड़ आदि जिले भी डेंगू से प्रभावित रहे हैं। इस बीच सोमवार को प्रदेश में 57 नए डेंगू के मामले मिले, हालांकि रविवार को छुट्टी होने के कारण यह आंकड़ा कम रहा। अब तक आधिकारिक तौर पर 5294 लोग डेंगू से पीड़ित हो चुके हैं। जबकि दस लोगों की मौत हो चुकी है। इससे पहले वर्ष 2013 में 1838 डेंगू के मामले मिले थे और चार मौतें हुई थीं। पिछले साल 2021 में 1709 डेंगू के मामले मिले थे और चार मौते हुई थीं, जबकि इस साल अब तक रिकार्ड मामले और मौतें हो चुकी हैं।