जम्मू। पाकिस्तान के देवा बटाला से वर्ष 1965 में अरनिया के कक्कू दे कोठे गांव में आ बसे शरणार्थियों ने बुधवार को जमीन का अधिकार और मुआवजा मांगा। उनका कहना था कि बॉर्डर से जुड़े विकास कार्यों के चलते उनकी जमीन का बड़ा हिस्सा बगैर इस्तेमाल रह जाता है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा से मिलकर उन्होंने अपनी मुश्किलें गिनाते हुए उन्होंने हल की मांग की। भाजपा किसान युवा मोर्चा के अध्यक्ष राकेश पंत की अगुवाई में दर्जनों शरणार्थी परिवारों का एक प्रतिनिधिमंडल त्रिकुटा नगर स्थित भाजपा कार्यालय पहुंचा था। उनका कहना था कि विस्थापन के बाद जमीन आवंटन के बावजूद आज तक उनके मालिकाना हक का मामला अनसुलझा है। इससे प्रभावित परिवारों को बहुत मुश्किल हो रही है। उन्हें अपनी जायज खेती की उपज आय से वंचित होना पड़ रहा है।
करीब तीन सौ शरणार्थी परिवारों की करीब 60 एकड़ जमीन इन कार्यों की वजह से जा रही है। उन्होंने आग्रह किया कि संबंधित अधिकारियों को प्रभावित परिवारों से सीधे बातचीत करने के निर्देश दिए जाएं ताकि वे जमीनी हकीकत का पता लगाकर उनकी शिकायत समझ सकें। सत शर्मा ने मुश्किलों के हल का पूरा भरोसा दिलाया। प्रतिनिधिमंडल में सुभाष चंदर, नरिंदर कौर आदि के साथ ही भाजपा प्रोटोकॉल टीम के सदस्य विक्रांत गुप्ता भी शामिल थे।