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Jammu News: परलाह पंचायत में पक गई गेहूं की फसल, शॉर्ट सर्किट से आग लगने का सता रहा डर

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किसानों ने की पंचायत में फायर ब्रिगेड का अस्थायी केंद्र बनाने की मांग
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संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। बॉर्डर क्षेत्र में गेहूं की फसल पक चुकी है और अगले 15 दिनों में इसकी कटाई शुरू हो जाएगी। इस दौरान किसानों में शॉर्ट सर्किट से गेहूं की फसल नष्ट हो जाने का डर बना हुआ है। जब तक फसल कटकर घर न आ जाए, तब तक किसान चिंतित रहते हैं। इसी समस्या को लेकर पंचायत परलाह के लोगों ने फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज और जिला प्रशासन के अपील की कि गांव में ही उन्हें फायर ब्रिगेड की एक गाड़ी दी जाए। उसके लिए गांव में पानी और उसके खड़े रहने की व्यवस्था बनी हुई है।
सीमांत क्षेत्र में फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेस का अरनिया कस्बे में एक सेंटर है। उसके अलावा अस्थायी तौर पर तरेवा क्षेत्र में फसल की कटाई के वक्त एक गाड़ी होती है। परलाह पंचायत के किसानों ने बताया कि दोनों क्षेत्र उनके क्षेत्र से अलग रह जाते हैं, और वह बॉर्डर क्षेत्र को ही कवर कर सकती हैं। इसलिए, गांव में फायर ब्रिगेड की एक गाड़ी की सख्त जरूरत है। कहा कि इसके लिए वह उपायुक्त से भी मुलाकात करेंगे और फायर ब्रिगेड की स्थायी गाड़ी के लिए मांग रखेंगे। पंच दर्शन कुंडल ने कहा कि जैसे ही गेहूं की फसल कटने के लिए तैयार हो जाती है, तभी शॉर्ट सर्किट होने से फसल जलने का डर बढ़ जाता है। पहले भी समय पर गाड़ी न पहुंचने को लेकर किसान बड़ा नुकसान झेल चुके हैं। इसलिए, प्रशासन को गांव में अस्थायी गाड़ी रखने के लिए अवगत करवाया जाएगा।
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स्थानीय युवा रिंकू कुमार ने बताया कि पूरे साल मेहनत करने के बाद अगर फसल जल जाती है, और ऊपर से आग बुझाने के लिए उचित बंदोबस्त नहीं होते तो फसल जलने का नुकसान किसान को बहुत पीछे ले जाता है। इसलिए, प्रशासन को गांव में अस्थायी प्वॉइंट बना देना चाहिए। स्थानीय गारू राम ने बताया कि जिला प्रशासन जरूरत के अनुसार गांव में एक अस्थायी प्वॉइंट बना दे जो मात्र 15 दिनों के लिए रहेगा। यह समय किसानों के लिए बड़ा मूल्यवान होता है। इससे किसानों की चिंता खत्म हो जाएगी।
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जिला प्रशासन की तरफ से फायर ब्रिगेड की गाड़ी के लिए अस्थायी प्वॉइंट बनाने की मांग रखी जाती है। उसके बाद क्षेत्र को गाड़ी देने के लिए जमीनी स्तर पर चेक किया जाता है। अगर उस क्षेत्र में गाड़ी की जरूरत होती है तो वहां पर अस्थायी प्वॉइंट बना दिया जाएगा।

- राजकुमार रैना, उप निदेशक, फायर एंड इमरजेंसी सर्विस
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