परिसीमन आयोग की अब तक एक ही बैठक हुई है। कोरोना संक्रमण के चलते दूसरी बैठक नहीं बुलाई जा सकी। दिल्ली में परिसीमन आयोग की गत मार्च महीने में हुई पहली बैठक में भाजपा के दोनों सांसदों डॉ. जितेंद्र सिंह व जुगल किशोर शर्मा ने भाग लिया था। नेशनल कांफ्रेंस के तीनों सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला, हसनैन मसूदी व मोहम्मद अकबर लोन ने बैठक का बहिष्कार किया था। उनका तर्क था कि अनुच्छेद 370 वैधानिक तरीके से नहीं हटाया गया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
इस वजह से वे बैठक का हिस्सा नहीं हो सकते। इस घटनाक्रम के दो महीने बाद मई में नेकां की केंद्रीय कार्यकारिणी की हुई बैठक में यह तय किया गया कि वे परिसीमन आयोग की बैठक से अपने को अलग नहीं रख सकते। लिहाजा वे बैठक का हिस्सा बनेंगे। नेकां के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि आयोग को अपना काम पूरा करने में सहूलियत रहेगी।