रियासत में किसी भी एक दल को बहुमत हासिल न होने और त्रिशंकु विधानसभा होने पर किसी भी दल के पास अपने संख्या बल बढ़ाने का अवसर नहीं है। जम्मू-कश्मीर के संविधान में अपना दलबदल विरोधी कानून है जो राष्ट्रीय दलबदल कानून से भिन्न है। यह कानून निर्वाचित प्रतिनिधियों को पार्टी व्हिप को धता बताकर कदम उठाने से रोकता है।
देशभर में लागू दलबदल विरोधी कानून के तहत किसी पार्टी के कुल निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या के एक-तिहाई से कम सदस्य विरोध करते हैं तो उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। लेकिन राज्य का कानून ज्यादा कठोर है।
रियासत के पूर्व एडवोकेट जनरल अल्ताफ नायक के अनुसार रियासत के दलबदल विरोधी कानून के तहत यदि पार्टी के तमाम विधायक भी पार्टी व्हिप की अवहेलना करते हैं तो उन्हें अयोग्य करार दिया जा सकता है।
इतना ही नहीं, दो दलों के विलय के दौरान भी यदि कोई एक या उससे सदस्य पार्टी व्हिप को अनदेखा कर अलग ग्रुप के रूप में काम करते हैं तो उन्हें अयोग्य करार दिया जा सकता है।