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उधमपुर में 10 बच्चों की मौत मामला: सुप्रीम कोर्ट ने की जेके सरकार की याचिका खारिज, कहा-आपकी लापरवाही से गई जान

Sat, 12 Nov 2022 01:57 AM IST
विमल शर्मा एजेंसी, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट से पहले प्रदेश सरकार की याचिका को हाईकोर्ट ने भी खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एमआर शाह और एमएम सुंदरेश की खंडपीठ ने कहा, बच्चों की मौत मामले में अधिकारियों की लापरवाही पाई गई है। हमें इस मामले में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखाई दे रहा।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media
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विस्तार
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आपके अफसर आम नागरिकों की जिंदगियों से नहीं खेल सकते। उधमपुर के रामनगर में दस बच्चों की जान घटिया दवा के सेवन से हुई थी। ये लापरवाही आपके अफसरों की है। हमें उद्योग और खाद्य विभाग के बारे में और बोलने को मजबूर न करें। सुप्रीम कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ जम्मू-कश्मीर सरकार की याचिका को खारिज कर दिया।

 

सरकार ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें बच्चों की मौत के लिए सरकारी विभागों की लापरवाही को जिम्मेदार माना गया था। इस मामले में एनएचआरसी ने मृतक बच्चों के परिवारों को तीन-तीन लाख की मुआवजा राशि देने के आदेश दिए थे।

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सुप्रीम कोर्ट से पहले प्रदेश सरकार की याचिका को हाईकोर्ट ने भी खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एमआर शाह और एमएम सुंदरेश की खंडपीठ ने कहा, बच्चों की मौत मामले में अधिकारियों की लापरवाही पाई गई है। हमें इस मामले में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखाई दे रहा।
 

कोर्ट ने कहा, आपके अफसरों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए। आम नागरिकों की सेहत उनके हाथ में है। वह अपनी ड्यूटी को सही तरीके से नहीं करते। अधिकारी आम नागरिकों की जिंदगियों से नहीं खेल सकते। यह उन्हीं का दायित्व है कि वह ठीक से जांच और सत्यापन करें।

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उधमपुर के रामनगर में दिसंबर 2019 और जनवरी 2020 के दौरान खांसी-जुकाम की दवा के सेवन से दस बच्चों की मौत हो गई थी। जांच में बच्चों की मौत का कारण इस दवा में अत्यधिक मात्रा में पाए गए एक रसायन को को माना गया।

अमर उजाला सामने लाया था केस, आयोग लेकर गए सुकेश 

रामनगर में बच्चों की संदिग्ध मौतों के मामले को सबसे पहले अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। लगातार खबरों से स्वास्थ्य विभाग भी हरकत में आया। जांच आगे बढ़ी तो जम्मू के सामाजिक कार्यकर्ता सुकेश खजूरिया ने सरकारी विभागों की लापरवाही के सुबूत जुटाकर मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के संज्ञान में लाया।
 

जिस दवा से बच्चों की मौत हुई, वह हिमाचल के काला अंब में स्थित एक कारखाने में बनी थी। सैंपल जांच में क्षेत्रीय ड्रग्स टेस्ट लैब ने कोल्ड बेस्ट पीसी सिरप नाम की दवा में डाइथिलीन ग्लाइकोल नाम के रसायन की मात्रा 35.87 फीसदी पाई थी। इसी को बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार पाया गया। जिन बच्चों ने इस दवा का सेवन किया था, उनकी किडनियां ही खराब हो गईं। 

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